
इलेक्टोरल बॉन्ड्स: फ्यूचर गेमिंग ने DMK नहीं TMC को दिया सबसे ज्यादा चंदा, जानें BJP और कांग्रेस के लिए कौन रहे सबसे बड़े दानवीर
AajTak
आजतक ने चुनावी बॉन्ड के आंकड़ों का विश्लेषण किया, जिसमें पता चला है कि भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष 10 दानदाताओं ने कुल 2,123 करोड़ रुपये का दान दिया, जबकि तृणमूल कांग्रेस के शीर्ष 10 दानदाताओं ने 1,198 करोड़ रुपये और कांग्रेस के शीर्ष 10 दानदाताओं ने 615 करोड़ रुपये का दान दिया.
भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने 21 मार्च को घोषणा की कि उसने यूनिक अल्फा-न्यूमेरिक आईडी सहित इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम के बारे में सभी विवरण भारतीय चुनाव आयोग (ECI) के साथ साझा कर दिए हैं. यह कार्रवाई इस सप्ताह की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट द्वारा एसबीआई को दिए गए एक आदेश के जवाब में थी, जिसमें बैंक को चुनावी बॉन्ड से जुड़ी सभी जानकारियां बिना शर्त इलेक्शन कमीशन के साथ शेयर करने के लिए कहा गया था.
प्रत्येक चुनावी बॉन्ड में एक विशेष नंबर होता है. यह यूनिक नंबर ही चुनावी बॉन्ड के खरीदार और उसे भुनाने वाली पार्टी के बीच लिंक जोड़ता है. इस साल 14 मार्च को दो सूचियों में खरीदारों और पार्टियों के नाम सार्वजनिक रूप से साझा किए गए थे. यह तीसरी बार है जब एसबीआई ने चुनावी बॉन्ड का डेटा सार्वजनिक किया है, और आखिरकार बॉन्ड नंबर भी जारी किए हैं, जिससे दान देने वालों और इसे प्राप्त करने वाली पार्टियों का मिलान करना आसान हो गया है.
आजतक ने चुनावी बॉन्ड के आंकड़ों का विश्लेषण किया, जिसमें पता चला है कि भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष 10 दानदाताओं ने कुल 2,123 करोड़ रुपये का दान दिया, जबकि तृणमूल कांग्रेस के शीर्ष 10 दानदाताओं ने 1,198 करोड़ रुपये और कांग्रेस के शीर्ष 10 दानदाताओं ने 615 करोड़ रुपये का दान दिया.
भाजपा के लिए शीर्ष दानदाताओं में मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड शामिल हैं, जिसने 584 करोड़ रुपये का दान दिया. क्विक सप्लाई चेन प्राइवेट लिमिटेड ने 375 करोड़ रुपये का दान दिया. इसके बाद वेदांता लिमिटेड ने 230 करोड़ रुपये, भारती एयरटेल ने 197 करोड़ रुपये और मदनलाल लिमिटेड ने 176 करोड़ रुपये का दान दिया.
तृणमूल कांग्रेस को सबसे ज्यादा 692 करोड़ रुपये का डोनेशन फ्यूचर गेमिंग एंड होटल सर्विसेज ने दिया. इसके बाद हल्दिया एनर्जी लिमिटेड 362 करोड़ रुपये, धारीवाल इंफ्रास्ट्रक्चर 90 करोड़ रुपये, एमकेजे एंटरप्राइजेज और एवेज ट्रेडिंग ने 46-46 करोड़ रुपये का दान दिया.

ट्रंप की ईरान को दी गई उस धमकी के बारे में बताएंगे जिसमें उन्होंने कहा कि कि ईरान दुनिया के नक्शे से मिट जाएगा. उनका ये बयान उस संदर्भ में आया है जिसमें दावा किया जा रहा है कि ईरान ट्रंप की हत्या कर सकता है. इस पर ट्रंप ने कहा अगर उन्हें कुछ भी हुआ तो अमेरिका की सेनाएं ईरान को धरती के नक्शे से मिटा देंगी. आज इस बात का विश्लेषण करेंगे कि क्या वाकई ईरान ट्रंप की हत्या की साजिश रच रहा है?

मौनी अमावस्या के दिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के स्नान को लेकर विवाद गहराया है. अविमुक्तेश्वरानंद सरकार पर कड़े तेवर दिखा रहे हैं. उन पर शंकराचार्य के अपमान का आरोप लगा है. समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. प्रयागराज में संगम नोज तक पालकी पर बैठकर अविमुक्तेश्वरानंद के स्नान करने से प्रशासन ने रोक लगा दी. समर्थकों और पुलिस के बीच झड़प भी हुई.

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार और ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद आमने सामने हैं. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सीधे सीधे योगी आदित्यनाथ को चुनौती दे रहे हैं तो प्रशासन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से पूछ रहा है कि बताएं वो शंकराचार्य कैसे हैं. लेकिन बात अब इससे भी आगे बढ़ गई है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के विरोधी उन्हें स्वयंभू शंकराचार्य बता रेह हैं.

227 सदस्यीय BMC में बहुमत के लिए 114 सीटों की जरूरत होती है. महायुति ने 118 वार्ड जीतकर बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है. इसके बावजूद मेयर पद को लेकर सहमति नहीं बन पाई है. स्थिति तब और नाटकीय हो गई, जब शिंदे ने कथित खरीद-फरोख्त की आशंका के चलते नवनिर्वाचित 29 शिवसेना पार्षदों को सप्ताहांत में एक फाइव-स्टार होटल में ठहरा दिया.

नोएडा केवल उत्तर प्रदेश का शो विंडो नहीं है, बल्कि प्रति व्यक्ति आय, प्रति व्यक्ति कंज्यूमर शॉपिंग, प्रति व्यक्ति इनकम टैक्स, प्रति व्यक्ति जीएसटी वसूली आदि में यह शहर देश के चुनिंदा टॉप शहरों में से एक है. पर एक शहरी की जिंदगी की सुरक्षा की गारंटी नहीं देता है. बल्कि जब उसकी जान जा रही हो तो सड़क के किनारे मूकदर्शक बना देखता रहता है.

उत्तर प्रदेश की सरकार और ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच चल रहे विवाद में नई उर्जा आई है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने खुली चुनौती के साथ योगी आदित्यनाथ को उनके शंकराचार्य होने पर सवाल उठाए हैं. इस मुद्दे ने राजनीति में तेजी से हलचल मचा दी है जहां विपक्ष शंकराचार्य के समर्थन में खड़ा है जबकि भाजपा चुप्पी साधे हुए है. दूसरी ओर, शंकराचार्य के विरोधी भी सक्रिय हुए हैं और वे दावा कर रहे हैं कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ही सच्चे स्वयंभू शंकराचार्य हैं.

उत्तर प्रदेश की सियासत में उल्टी गंगा बहने लगी है. मौनी अमावस्या के दिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के स्नान को लेकर हुआ विवाद अब बड़ा मुद्दा बन गया है. जहां खुद अविमुक्तेश्वरानंद के तेवर सरकार पर तल्ख हैं, तो वहीं बीजेपी पर शंकराचार्य के अपमान को लेकर समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रयागराज में संगम नोज तक पालकी पर जाकर स्नान करने से उन्हें रोका था.






