
इटली में मुसोलिनी की समर्थक नेता बनी देश की पहली महिला PM, 77 साल में 70 बार बदली सरकार
AajTak
जॉर्जिया मेलोनी ने चुनाव से पहले फॉर्जा इटालिया (Forza Italia) और द लीग के साथ गठबंधन किया था. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गठबंधन को 43% वोट मिले. जॉर्जिया मेलोनी की पार्टी ने 26% वोट हासिल किए. वामपंथी डेमोक्रेटिक पार्टी के नेतृत्व वाले गठबंधन को करीब 26 प्रतिशत वोट मिले. वहीं, 5-स्टार मूवमेंट को 15% वोट मिले.
इटली में हुए आम चुनावों (Italy election) में जॉर्जिया मेलोनी (Giorgia Meloni) ने इतिहास रच दिया. वे देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बन गई हैं. ब्रदर ऑफ इटली पार्टी की नेता जॉर्जिया मेलोनी ने पूर्व पीएम मारियो द्रागी को बड़े अंतर से मात दी. इसी के साथ इटली में दूसरे विश्व युद्ध के बाद दक्षिण पंथी सरकार का भी रास्ता साफ हो गया. इटली में 1945 के बाद 2022 तक 77 साल में 70वीं बार सरकार बदली है. जॉर्जिया मेलोनी के पीएम बनने के साथ ही इटली के फाशिस्ट तानाशाह बेनिटो मुसोलिनी की भी चर्चा तेज हो गई. दरअसल, जॉर्जिया मेलोनी खुद को मुसोलिनी समर्थक मानती हैं.
जॉर्जिया मेलोनी ने चुनाव से पहले फॉर्जा इटालिया (Forza Italia) और द लीग के साथ गठबंधन किया था. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गठबंधन को 43% वोट मिले. जॉर्जिया मेलोनी की पार्टी ने 26% वोट हासिल किए. वामपंथी डेमोक्रेटिक पार्टी के नेतृत्व वाले गठबंधन को करीब 26 प्रतिशत वोट मिले. वहीं, 5-स्टार मूवमेंट को 15% वोट मिले हैं. मेलोनी गठबंधन सीनेट की 114 सीटें जीतने में सफल रहीं. इटली में बहुमत साबित करने के लिए सीनेट की 104 सीटों की जरूरत है. इटली में निवर्तमान पीएम मारियो द्रागी की सरकार गठबंधन में शामिल अन्य दलों के समर्थन वापस लेने के बाद जुलाई में गिर गई थी.
सिर्फ चार साल में 4% वोट से पीएम बनने का सफर किया तय
ब्रदर ऑफ इटली दक्षिणपंथी पार्टी है. इसका गठन बेनिटो मुसोलिनी के समर्थकों द्वारा किया गया. जॉर्जिया मेलोनी की पार्टी ब्रदर ऑफ इटली को अपने उदय के करीब एक दशक बाद यानी 2018 के चुनाव में सिर्फ 4% वोट मिले थे. तब मारियो द्रागी पीएम बने थे. मेलोनी इटली की जनता में तब चर्चित हुईं, जब उनकी पार्टी ने द्रागी के नेतृत्व वाले नेशनल यूनिटी गठबंधन में शामिल न होने का फैसला करते हुए मुख्य विपक्षी दल बनी थी.
कौन हैं मेलोनी, जिन्होंने पूर्व पीएम मारियो द्रागी को दी मात?
जॉर्जिया मेलोनी का जन्म रोम में हुआ. जब वे एक साल की थीं, तब उनके पिता फ्रांसेस्को ने मां को छोड़ दिया और कैनरी आइसलैंड आकर रहने लगे. फ्रांसेस्को वामपंथी थे, जबकि मेलोनी दक्षिणपंथी थीं. बताया जाता है कि वे अपनी मां से प्रेरित होकर ही दक्षिणपंथी विचारधारा की हैं. जॉर्जिया मेलोनी 15 साल की उम्र में इतालवी सामाजिक आंदोलन (MSI) की युवा शाखा यूथ फ्रंट में शामिल हुईं. इसके बाद वे आंदोलन की स्टूडेंट विंग की अध्यक्ष भी बनीं.

कल्पना कीजिए, दुनिया की सबसे बड़ी सेना का कमांडर, एक ऐसा शख्स जिसके हाथ में परमाणु बटन है. उसे एक छोटा सा 'लेगो खिलौना' बना दिया जाए जो पसीना बहा रहा है. हम बात कर रहे हैं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की. युद्ध के मैदान में विमानवाहक पोत यानी Aircraft Carriers उतर रहे हैं, लेकिन इंटरनेट पर ईरान ने 'लेगो मीम्स' उतार दिए हैं. जब कोई देश आसमान में आपसे नहीं जीत पाता, तो क्या वो आपके फोन के जरिए आपको हरा सकता है?

ईरानी मीडिया की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, एक सैन्य सूत्र ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान के द्वीपों पर हमला हुआ तो वह 'बाब अल-मंडेब' स्ट्रेट में एक नया मोर्चा खोल सकता है. यह समुद्री रास्ता दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों में से एक है. यूरोप, एशिया और मिडिल ईस्ट के बीच होने वाले तेल और गैस का अधिकांश ट्रांसपोर्टेशन इसी रास्ते से होता है.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने मिडिल ईस्ट संघर्ष पर चिंता जताते हुए फ्रांसीसी राजनयिक जीन आर्नो को विशेष दूत नियुक्त किया है. उन्होंने कहा कि हालात नियंत्रण से बाहर होते जा रहे हैं और बड़े युद्ध का खतरा बढ़ रहा है. गुटेरेस ने शांति वार्ता को जरूरी बताते हुए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से वैश्विक आपूर्ति पर असर की चेतावनी दी. उन्होंने अमेरिका-इजरायल से युद्ध खत्म करने और ईरान व हिज़्बुल्लाह से हमले रोकने की अपील की.

ईरान जंग शुरु होते ही पाकिस्तान ने अपने यहां पेट्रोल-डीजल में 55 रुपये प्रति लीटर का इजाफा कर दिया गया. जनता के गुस्से को शांत करने के लिए शहबाज-मुनीर ने पाकिस्तान के मध्यस्थ बनने का दांव खेला पाकिस्तान के लोगों का ही दावा है कि विदेशी मीडिया से पाकिस्तान के मध्यस्थ होने को लेकर खबरें छपवाईं. लेकिन ईरान ने पाकिस्तान हकीकत उसका होर्मुज से जहाज रोककर बता दी. अब पाकिस्तान के लोग ही पूछ रहे हैं कि जब हमारा एक जहाज होर्मुज पार नहीं कर सकता. तो हम मध्यस्थ क्या खाक बनेंगे.









