
इजरायल और ईरान युद्ध को लेकर क्यों और कैसे बदलते गए अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के सुर
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ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों के लिए यह बात बहुत साफ हो गई थी कि वे इस बार नेतन्याहू को नहीं रोक पाएंगे, जैसा कि प्रशासन के विचार-विमर्श में शामिल प्रमुख लोगों और उनकी सोच से परिचित अन्य लोगों के साथ बातचीत में पता चला. उसी समय, ट्रंप ईरान के साथ वार्ता की धीमी गति को लेकर परेशान हो रहे थे और यह निष्कर्ष निकालने लगे थे कि वार्ता कहीं नहीं पहुंच सकती.
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने कार्यकाल के पहले कुछ महीने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर हमले के लिए इजरायल की कोशिश को रोकने में बिता दिए. युद्ध के चलते अब उनका रुख अमेरिकी सेना को जंग में भेजने की तरफ है. पिछले महीने के अंत तक, इजरायल की सैन्य गतिविधियों पर नजर रखने वाली अमेरिकी जासूसी एजेंसियां और देश के राजनीतिक नेतृत्व के बीच विचार-विमर्श एक चौंकाने वाले नतीजे पर पहुंचे थे. प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, अमेरिका की भागीदारी के साथ या उसके बिना, ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर हमले की योजना बना रहे थे.
हमले को लेकर नेतन्याहू के पक्के इरादे
'न्यूयॉर्क टाइम्स' की रिपोर्ट के मुताबिक नेतन्याहू ने एक दशक से भी ज़्यादा समय तक चेतावनी दी थी कि ईरान के परमाणु हथियार बनाने की स्थिति में पहुंचने से पहले उस पर ज़बरदस्त सैन्य हमला ज़रूरी है. फिर भी मिडिल ईस्ट में एक और जंग के नतीजों से भयभीत कई अमेरिकी राष्ट्रपतियों की ओर से यह कहे जाने के बाद कि संयुक्त राज्य अमेरिका हमले में सहायता नहीं करेगा, अमेरिका अपने बयान से पीछे हट जाता है.
लेकिन इस बार, अमेरिकी खुफिया आकलन यह था कि नेतन्याहू न सिर्फ परमाणु प्रतिष्ठानों पर सीमित हमले की तैयारी कर रहे थे, बल्कि एक बहुत व्यापक हमले की तैयारी कर रहे थे, जो ईरानी शासन को ही खतरे में डाल सकता था और वह इसे अकेले करने के लिए तैयार थे.
खुफिया जानकारी के कारण राष्ट्रपति ट्रंप के सामने मुश्किल विकल्प आ गए हैं. वह ईरान को अपनी परमाणु महत्वाकांक्षाओं को त्यागने के लिए राजी करने के कूटनीतिक प्रयास में लग गए थे और अप्रैल में नेतन्याहू की तरफ से उन्हें यह समझाने के एक प्रयास को पहले ही विफल कर चुके थे कि ईरान पर सैन्य हमला करने का सही समय आ गया है. मई के अंत में एक तनावपूर्ण फ़ोन कॉल के दौरान, ट्रंप ने फिर से इजरायली नेता को एकतरफा हमले के खिलाफ़ चेतावनी दी थी.
ईरान से कूटनीतिक वार्ता फेल

मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर है. अमेरिका ने USS Abraham Lincoln कैरियर ग्रुप अरब सागर में तैनात कर ईरान पर हमले की धमकी दी है. ईरान डर से अपने न्यूक्लियर साइट्सको गहराई में छिपा रहा है. टनल सील कर रहा है. ड्रोन कैरियर शहीद बघेरी को बंदर अब्बास से 6 किमी दूर रखा है. IRGC 1-2 फरवरी को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में लाइव-फायर एक्सरसाइज करेगा.

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