
आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई: जेल की कोठरी से ईरान के सर्वोच्च नेता तक का सफ़र
BBC
महज़ 11 साल की उम्र में मौलवी बने ख़ामेनेई स्वयं को सुप्रीम लीडर पद के योग्य नहीं मानते थे, लेकिन सत्ता में आने के बाद उन्होंने धीरे-धीरे अपनी स्थिति मज़बूत कर ली.
ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की मौत हो चुकी है. ईरान के सरकारी टीवी चैनल ने इसकी पुष्टि की है.
ख़ामेनेई एक बार नहीं बल्कि अलग-अलग मौक़ों पर कई बार ये ज़ाहिर कर चुके थे कि इसराइल को लेकर उनके इरादे क्या हैं.
ख़ामेनेई खुलकर इसराइल के अस्तित्व को मिटाने की बात करते रहे. वो लंबे समय से इसराइल को पश्चिम एशियाई क्षेत्र का एक ऐसा 'कैंसरग्रस्त ट्यूमर' बताते रहे, जिसे उखाड़ फेंकना ज़रूरी है और उनके मुताबिक़ ये होकर रहेगा.
बीते साल जून में शायद ये पहली बार था जब इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने ख़ामेनेई को निशाने पर लिए जाने से जुड़ी कोई बात सीधे और सार्वजनिक तौर पर कही हो.
एबीसी चैनल को दिए एक इंटरव्यू में इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू से जब पूछा गया कि क्या अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने, ईरान के सुप्रीम लीडर की हत्या से जुड़ी इसराइली योजना को ये कहते हुए ख़ारिज कर दिया कि इससे क्षेत्र में संघर्ष बढ़ सकता है?
नेतन्याहू ने जवाब में कहा था कि ख़ामेनेई की मौत "संघर्ष को बढ़ाने के बजाय, उसे ख़त्म करने का काम करेगी."
नेतन्याहू के इस बयान से यह संकेत मिला कि इसराइल, आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई को निशाना बनाने की योजना पर काम कर रहा है, लेकिन अमेरिका के राष्ट्रपति की ओर से उसे अब तक हरी झंडी नहीं मिली है.

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