
आतंकवाद की जड़ कहां है? चिदंबरम-अबू आजमी को जम्मू-कश्मीर के एसपी का जरूरी जवाब
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दिल्ली ब्लास्ट के बाद आतंकवाद की जड़ों पर पी. चिदंबरम के सवाल का जम्मू-कश्मीर के एक पुलिस अफसर ने पेशेवर जवाब दिया है. पुलिस अफसर के मुताबिकस, आतंकवाद अन्याय का नतीजा नहीं, धार्मिक कट्टरता को पीड़ित मानसिकता समझने की गलती है.
दिल्ली ब्लास्ट की जांच जारी है. दिन भर लगातार नए खुलासे हो रहे हैं. और, अब तो सरकार ने भी मान लिया है कि ये आतंकवादी हमला था. लेकिन, ये पहलगाम हमले से अलग है. दिल्ली धमाके में पहलगाम की तरह विदेशी आतंकवादी शामिल नहीं हैं. इसी के बाद आतंकवाद की पैदाइश पर महाराष्ट्र से समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आजमी ने जो लाइन ली है, पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम उसी को अपने तरीके से आगे बढ़ाया है. दोनों की पोस्ट में कॉमन बात ये है कि दोनों आतंकियों को परिस्थिति का मारा बता रहे हैं. अबू आजमी को तो नहीं, लेकिन देश के पूर्व गृह मंत्री पी. चिदंबरम को एक पुलिस अफसर ने माकूल और विस्तार से जवाब दिया है.
एक प्रोफेशनल और एक्सपर्ट की तरह समझाते हुए पुलिस अफसर ने भारत के साथ ही दुनिया के कई देशों में फैले आतंकवाद का उदाहरण भी दिया है. जम्मू-कश्मीर में तैनात एसपी प्रणव महाजन ने बड़े ही साफ शब्दों में बताया है, 'आतंकवाद अन्याय का नतीजा नहीं, एक मानसिक बीमारी है, और फलती-फूलती है तब है जब हम कट्टरता को पीड़ित मानसिकता समझने की भूल कर बैठते हैं.'
अबू आजमी और चिदंबरम ने आतंकवाद की पैदाइश पर क्या कहा-
अपनी पोस्ट के आखिर में पी. चिदंबरम ने जो सवाल उठाया है, वो भी वही सवाल है जो अबू आजमी उठा रहे हैं. भले ही ये इत्तफाक हो, लेकिन ये पॉलिटिकल लाइन कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के गठबंधन को तो सूट करती ही है. अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आजमी ने लखनऊ में कहा, 'हम देख रहे हैं, जब चुनाव होता है तो इस तरह की चीज होती है... इसकी जांच होनी चाहिए. जो लोग ब्लास्ट में शामिल हैं, उन्हें पकड़कर 6 महीने के अंदर फांसी देनी चाहिए... मुंबई में जो ट्रेन में हमला हुआ था, उसमें निर्दोष लोग पकड़े गये थे... ऐसा इस केस में नहीं होना चाहिए. जुल्म और नाइंसाफी से आतंकवाद पैदा होता है... आतंकवाद को खत्म किया जाना चाहिए... दिल्ली में बलास्ट होना मतलब सरकार की चूक है.'
अबू आजमी की बात को आगे बढ़ाते हुए पी. चिदंबरम लिखते हैं, 'ये बात मैं पहले भी कह चुका हूं, और पहलगाम अटैक के बाद भी याद दिलाई है कि आतंकवादी दो तरीके के होते हैं - विदेशों में प्रशिक्षित और घुसपैठ करके आने वाले आतंकवादी, और देश के भीतर ही पैदा हुए आतंकवादी.'
यूपीए सरकार में केंद्रीय गृह मंत्री रह चुके चिदंबरम का कहना है, संसद में ऑपरेशन सिंदूर पर चली बहस के दौरान भी मैंने यही बात कही थी... ‘होम-ग्रोन टेररिस्ट’ का जिक्र करने पर मेरा मजाक उड़ाया गया, और मुझे ट्रोल किया गया... मुझे कहना होगा, सरकार ने चुप्पी साधे रखी... क्योंकि, सरकार भी जानती है कि देश के भीतर पैदा होने वाले आतंकवादी भी मौजूद हैं... इस पोस्ट का असली मकसद ये है कि हमें खुद से पूछना चाहिए कि ऐसी कौन सी परिस्थितियां हैं, जो भारतीय नागरिकों और वो भी पढ़े लिखे लोगों को आतंकवादी बनने तक धकेल देती हैं.'

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