
आज का दिन: क्या योगी सरकार मदरसों की कमियां निकालने में लगी है?
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मुस्लिम वोट तक पहुंच बनाने के लिए क्या है BJP का प्लान, ग़ैर मान्यता प्राप्त मदरसों पर क्या होगा योगी सरकार का एक्शन? और मिड टर्म चुनाव में जो बाइडेन की मुश्किलें किन वजहों से कुछ कम हो सकती हैं?, सुनिए 'आज का दिन' में अमन गुप्ता के साथ.
आज तक रेडियो आप के लिए लाता है सुबह सवेरे देश का पहला मॉर्निंग न्यूज़ पॉडकास्ट ‘आज का दिन’, जहां आप हर सुबह अपने काम की शुरुआत करते हुए सुन सकते हैं आपके काम की ख़बरें और उन पर क्विक एनालिसिस. साथ ही, सुबह के अख़बारों की सुर्ख़ियाँ और आज की तारीख में जो घटा, उसका हिसाब किताब. आगे लिंक भी देंगे लेकिन पहले जान लीजिए कि आज के एपिसोड में हमारे पॉडकास्टर अमन गुप्ता किन ख़बरों पर बात कर रहे हैं.
क्या योगी सरकार मदरसों की कमियां निकालने में लगी है?
यूपी में योगी सरकार की तरफ से मदरसों के सर्वे पिछले ही हफ्ते पूरे हुए हैं. कहा जा रहा है कि इन मदरसों के सर्वे के बाद पता चला है कि करीब 7500 मदरसे गैर मान्यता प्राप्त हैं. इसी फेहरिस्त में शामिल है दारूल उलूम देवबंद. अब बात ये भी चल रही है कि जो गैर मान्यता प्राप्त मदरसे हैं सरकार उन पर कार्रवाई करे. लेकिन विपक्ष सरकार को दो तरीके से घेर रहा है. एक तो यूपी सरकार के इस सर्वे पर ही सवाल उठाए जा रहे हैं. सपा समेत कई पार्टियों के लोग कह रहे हैं कि मुसलमानों को परेशान करने के लिए किया जा रहा है. दूसरी तरफ विपक्ष का एक धड़ा ये भी है जो कह रहा है कि जो मदरसे मान्यता प्राप्त नहीं है , सरकार उनको अपनी देख रेख में सुचारू बनाए. उनको मदद दे और फिर उनको चलाए. कल मायावती ने यही कह कर बीजेपी सरकार पर निशाना साधा. हालांकि धीरे धीरे मदरसों को लेकर चल रही पॉलिटिक्स को एक लम्बा समय हो चला है. तो दारुल उरूल देवबंद के गैर मान्यता प्राप्त होने के बारे में क्या कहा जा रहा है और यदि ऐसा है तो सरकार किस तरह के एक्शन लेने की तैयारी में है? विपक्ष कह रहा है कि सरकार मदरसों की स्थिति सुधारने की बजाय उनकी कमी निकाल रही है योगी सरकार, तो ग्राउंड पर असल स्थिति क्या है?
मुस्लिम वोटर्स तक पहुंच क्यों बढ़ाना चाहती है BJP?
बीजेपी दो बार से केंद्रीय सत्ता पर काबिज है. कई राज्यों में उसकी सरकार है. कारण है कि हर समय बीजेपी और उसके संगठन मिलकर कमजोरी को मजबूती बनाने में जुटे रहते हैं. इसी क्रम में बीजेपी की तरफ से एक और कोशिश शुरू हुई है जो राजनीतिक पंडितों के लिए थोड़े अचरज की बात है. दरअस्ल बीजेपी मुस्लिम वोटर्स तक पहुंचने की जुगत में है. हालांकि मौजूदा राजनीति में बीजेपी जिस ओर खड़ी दिखती है लोगों का दावा है कि उसे इसकी जरूरत नहीं. लेकिन साउथ में बीजेपी की कोशिशों से ऐसा दिखने लगा है कि बीजेपी चुनावों में इस वर्ग को भी अपने हिस्से ले आना चाहती है, तो बीजेपी को इसकी जरूरत क्यों लग रही है कि मुस्लिम वोटर्स तक अपनी पहुंच बढाई जाए? मिड टर्म चुनाव में क्या हैं जो बाइडेन की मुश्किलें?
अमेरिका में मिड टर्म इलेक्शन अगले ही महीने होने है. और राष्ट्रपति जो बाइडेन की डेमोक्रेटिक पार्टी की परेशानी बढ़ने जा रही है. कोरोना मिस मैनेजमेंट , इकोनॉमी और कई मुद्दों पर घिरे बाइडेन की जिस हिसाब से पॉप्युलैरिटी घटी है , कहा जा रहा है इन चुनावों में उनकी पार्टी पीछे खिसक सकती है और रिपब्लिकन पार्टी जिसका चेहरा ट्रम्प हैं वो सीनेट में बहुमत पा सकती है. हालांकि अमेरिका में ये पहली बार नहीं हो रहा, ओबामा से लेकर ट्रम्प दोनों के कार्यकाल में इनकी पार्टियों ने मिड टर्म इलेक्शन में सांसदों का बहुमत खोया है. लेकिन बाइडेन के केस में हालात और कठिन हैं। तो अब जब अगले महीने ही मध्यावधि चुनाव होने जा रहे हैं, बाइडेन के सामने क्या चुनौतियां और उपलब्धियां क्या हैं?

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