
आंखों पर पट्टी बांधकर फायरिंग, 47 फुट दीवार पर चढ़ाई... ऐसे तैयार किए जाते हैं दिल्ली पुलिस के स्मार्ट कॉप!
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दिल्ली पुलिस के नए रंगरूट जब एकेडमी में कदम रखते हैं तो उन्हें अंदाजा भी नहीं होता कि अगले महीनों में उनका शरीर, दिमाग और हौसले किस स्तर पर तपने वाले हैं. आंखों पर पट्टी बांधकर फायरिंग से लेकर 47 फुट दीवार पर चढ़ने तक हर अभ्यास उन्हें असली मुकाबले के लिए गढ़ता है.
दिल्ली पुलिस के 291 नए रंगरूट इन दिनों ट्रेनिंग के दौर से गुजर रहे हैं. देश की राजधानी की सुरक्षा संभालने से पहले इन्हें जिस फिजिकल और मेंटल ग्राइंड से गुजरना पड़ता है, वो दिल्ली पुलिस को देश की सबसे अनुशासित और सबसे स्मार्ट फोर्स बनाने की रीढ़ है. यहां हर दिन एक युद्ध जैसा है और हर अभ्यास किसी असली ऑपरेशन की तैयारी है.
ट्रेनिंग की सबसे कठिन कड़ी वह सेशन है जिसमें जवानों की आंखों पर पट्टी बांध दी जाती है. कुछ भी देखे बिना हथियार लोड करना, पोजिशन लेना और टारगेट की दिशा का अंदाजा लगाकर फायर करना. इस अभ्यास का मकसद जवानों को उस स्थिति के लिए तैयार करना है जब अंधेरा हो, धुआं हो या दुश्मन सामने न दिख रहा हो.
उसी के बाद उन्हें FATS यानी फायर आर्म्स ट्रेनिंग सिम्युलेटर में ले जाया जाता है, जहां लेजर-बेस्ड टारगेट्स पर सैकड़ों वर्चुअल शॉट फायर करवाए जाते हैं. असली हथियार हाथ में आने से पहले उनकी उंगलियां मशीन की तरह काम करने लगती हैं. इसके आगे जो दीवार सामने आती है, वह किसी भी आम इंसान के लिए नामुमकिन है.
47 फुट ऊंची यानी तीन मंजिला इमारत जितनी. लेकिन दिल्ली पुलिस के ये रंगरूट इसे कुछ ही सेकंड में पार कर जाते हैं. चढ़ना ही नहीं, रस्सी के सहारे उसी स्पीड में नीचे उतरने का अभ्यास भी किया जाता है. किसी भी ऑपरेशन में बिल्डिंग की ऊपर या नीचे से एंट्री इन्हें चंद सेकंड में लेनी होती है. ट्रेनिंग ग्राउंड में सबसे मुश्किल ऑब्स्टिकल कोर्स है.
यहां धूप, थकान और मौसम की कोई इजाज़त नहीं है. दीवारें, गड्ढे, बैलेंस बीम, खंभे, ऊंची सीढ़ियां. तापमान 45 डिग्गी तक पहुंच जाए तो भी इनके कदम धीमे नहीं पड़ते. सुबह 6 बजे शुरू हुई ट्रेनिंग कई बार दोपहर 1 बजे तक चलती है. यहां सिर्फ एक नियम है, मिशन पहले, मौसम बाद में. दोपहर में मेस खुलते ही रंगरूट लाइन में लग जाते हैं.

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