
असम: कार्बी आंगलोंग में फिर भड़की हिंसा, पुलिस ने दागे आंसू गैस के गोले, कई इलाकों में इंटरनेट सर्विस सस्पेंड
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प्रशासन का कहना है कि यह कदम अफवाहों और भ्रामक सूचनाओं के प्रसार को रोकने तथा हालात को और बिगड़ने से बचाने के लिए उठाया गया है. अधिकारियों के मुताबिक, स्थिति फिलहाल तनावपूर्ण बनी हुई है और अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती कर दी गई है.
असम के अशांत कार्बी आंगलोंग जिले में लंबे समय से चल रहे चराई भूमि (ग्रेजिंद लैंड) विवाद को लेकर मंगलवार को फिर हिंसा भड़क गई. इसके बाद राज्य सरकार ने कई इलाकों में इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी हैं. प्रशासन का कहना है कि यह कदम अफवाहों और भ्रामक सूचनाओं के प्रसार को रोकने तथा हालात को और बिगड़ने से बचाने के लिए उठाया गया है. अधिकारियों के मुताबिक, स्थिति फिलहाल तनावपूर्ण बनी हुई है और अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती कर दी गई है.
दरअसल, इलाके में धारा 144 लागू होने के बावजूद बड़ी संख्या में लोग, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे, जिनकी दुकानें सोमवार को भीड़ ने जला दी थीं, हिंसा के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने के लिए बाहर आए, जबकि आदिवासी इलाके से अतिक्रमणकारियों को हटाने की मांग कर रहे आंदोलनकारी भी खेरोनी बाज़ार इलाके में जमा हो गए. हालात को काबू में करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले दागने पड़े. पुलिस की कार्रवाई के दौरान कम से कम आठ लोग घायल हो गए.
क्यों प्रदर्शन कर रहे लोग
जानकारी के अनुसार, जिले के फेलांगपी (Phelangpi) इलाके में पिछले दो हफ्ते से अधिक समय से कार्बी समुदाय और अन्य आदिवासी समूहों के लोग अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर थे. प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि ग्राम चराई आरक्षित भूमि (VGR) और पेशेवर चराई आरक्षित भूमि (PGR) पर कथित तौर पर अवैध रूप से बसे लोगों को हटाया जाए. ये जमीनें संविधान की छठी अनुसूची के तहत आदिवासी समुदायों के भूमि अधिकारों की सुरक्षा के लिए संरक्षित हैं.
22 दिसंबर को भड़की थी हिंसा
तनाव उस समय और बढ़ गया जब 22 दिसंबर की तड़के प्रशासन ने खेरोनी (Kheroni) इलाके में भूख हड़ताल कर रहे प्रदर्शनकारियों को हटाने की कोशिश की. इसके बाद प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पें हो गईं. हालात तेजी से बेकाबू होते चले गए. इसी दिन हालात तब और गंभीर हो गए जब प्रदर्शनकारियों पर आरोप है कि उन्होंने कार्बी आंगलोंग स्वायत्त परिषद (KAAC) के मुख्य कार्यकारी सदस्य डॉ. तुलिराम रोंगहांग के डोनकामोकाम स्थित आवास में आग लगा दी. इस घटना के बाद पूरे पहाड़ी जिले में तनाव फैल गया और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई.

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