
अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी से बीजेपी को कितना फायदा, कितना नुकसान?
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दिल्ली में आम आदमी पार्टी ही नहीं बीजेपी के समर्थक भी यह समझ नहीं पा रहा है कि केजरीवाल की गिरफ्तारी लोकसभा चुनावों के पहले कैसे हो गई ? बहुत से लोगों को ऐसा लगता है कि इस गिरफ्तारी से आप और कांग्रेस को लोकसभा चुनावों में दिल्ली की सारी सीटें जीतने एक मौका मिल गया है. लेकिन क्या ऐसा संभव है?
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद एक बात जिसकी चर्चा बीजेपी और आम आदमी पार्टी दोनों के ही समर्थक कर रहे हैं कि गिरफ्तारी का असर आगामी लोकसभा चुनावों के नतीजों पर कितना पड़ेगा? आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के समर्थकों का मानना है कि केजरीवाल की गिरफ्तारी लोकसभा चुनावों में राजनीतिक संभावनाओं के लिए एक हथियार के रूप में काम करेगी. बीजेपी के कट्टर समर्थकों को छोड़कर सामान्य वोटर जिनका वोट बीजेपी को जा सकता है उन्हें भी ऐसा लगता है कि अरविंद केजरीवाल और कांग्रेस को बीजेपी सरकार ने लोकसभा चुनावों में दिल्ली में सारी सीटें जीतने एक मौका दे दिया. तो फिर क्या मान लिया जाए कि बीजेपी के चाणक्य जनता की नब्ज समझ नहीं सके? तो जान लीजिए कि ऐसा भी नहीं है कि बीजेपी को धुरंधर नेताओं को जनता की नब्ज समझने की क्षमता नहीं है. आइए देखते हैं कि केजरवाल की गिरफ्तारी किस तरह अगले चुनाव में काम करेगी? इस गिरफ्तारी से मलाई कौन खाएगा?
1-गिरफ्तारी एक कानूनी मामला या की राजनीतिक
अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद दिल्ली के नागरिकों को जो यह अच्छी तरह समझा सकेगा कि यह गिरफ्तारी कानूनी मामला है, न कि राजनीतिक. उसे ही लोकसभा चुनावों में फायदा होने वाला है. अगर केजरीवाल अपने समर्थकों को यब समझाने में सफल हुए कि यह मामला पूरी तरह राजनीतिक है तो यह बीजेपी के लिए उल्टा पड़ जाएगा.
केंद्र सरकार शायद इसीलिए किसी तरह के जल्दबाजी के मूड में नहीं थी. अरविंद केजरीवाल के पास महीनों से ईडी के समन आ रहे थे. लगातार 10 समन के बाद उनकी गिरफ्तारी हुई है. यह सब कसरत सिर्फ इसी लिए हुई होगी ताकि लोगों के मन में यह बात बैठाई जा सके कि कानून अपना काम कर रहा है.
भाजपा, जिसने पिछले साल दिल्ली जल बोर्ड घोटाला सहित 10 बड़े घोटालों पर आप को घेरने के लिए 400-दिवसीय रणनीति पर काम करना शुरू किया था. इस बीच केजरीवाल को ईडी द्वारा समन भी जारी किया जाता रहा. ताकि आप संयोजक को भ्रष्टाचार का चेहरा बनाया जा सके. इसके बाद केजरीवाल की गिरफ्तारी हुई है. ताकि यह बताया जा सके कि यह एक कानूनी मामला था न कि राजनीतिक मामला.
हालांकि इस गिरफ़्तारी से निश्चित रूप से दिल्ली में इंडिया गठबंधन के और मजबूत होने की सभावना है. जिस तरह कांग्रेस पार्टी के नेताओं संदीप दीक्षित और अरविंदर सिंह लवली आदि जो कभी केजरीवाल के लिए आग उगलते रहे हैं, अब केंद्र सरकार को घेर रहे हैं. इससे यही लगता है कि इस गिरफ्तारी ने विपक्ष को दिल से एकजुट करने का मौका दे दिया है. दोनों पार्टियों का शहर की मलिन बस्तियों, अनधिकृत कॉलोनियों और निम्न-मध्यम वर्गीय परिवारों में एक समान समर्थन का आधार है. केजरीवाल की गिरफ्तारी से अगर सहानुभूति की लहर दौड़ती है तो इंडिया गठबंधन को मजबूत करने में मदद मिलेगी.

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