
अमेरिका नहीं तो चीन-मिडिल ईस्ट? वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारी ने बताया टैरिफ झटके से कैसे निपटेगा भारत
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अमेरिका ने भारत पर 50% टैरिफ लागू कर दिया है, जिससे भारत के निर्यातकों को बड़ा नुकसान होने की संभावना है. नौकरियां जाने की भी आशंका जताई जा रही है. हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि कुछ उपायों से टैरिफ के प्रभाव को कम किया जा सकता है.
भारत पर अमेरिका का 50% टैरिफ बुधवार को लागू हो गया है. यह टैरिफ अमेरिका को भारत के निर्यात पर बड़ा असर डालने वाला है और इसके प्रभाव अभी से दिखने शुरू हो गए हैं. अमेरिका भारत का सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर है और वो अपने कुल निर्यात का 20 फीसद अमेरिका को करता है. ऐसे में टैरिफ बढ़ने से भारत के विकास की रफ्तार धीमी होने की संभावना है. इन्हीं सभी आशंकाओं के बीच वाणिज्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा है कि भारत के निर्यातक अब चीन और मिडिल ईस्ट के देशों की तरफ रुख कर सकते हैं.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, वाणिज्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि टैरिफ से प्रभावित निर्यातकों को वित्तीय सहायता मिलेगी. अधिकारी ने कहा कि उन निर्यातकों को चीन, लैटिन अमेरिका और मध्य पूर्व जैसे बाजारों में अपना सामान बेचने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा.
निर्यातक समूहों का अनुमान है टैरिफ से अमेरिका को भारत के कुल निर्यात (87 अरब डॉलर के निर्यात) का लगभग 55% प्रभावित हो सकता है. उनका कहना है कि भारत पर टैरिफ बढ़ाने से वियतनाम, बांग्लादेश और चीन जैसे प्रतिस्पर्धियों को फायदा होगा.
एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारत अगर टैरिफ के प्रभाव को कम कर प्रतिस्पर्धा में बने रहना चाहता है तो उसे कुछ उपाय करने होंगे. मुंबई के इंदिरा गांधी विकास अनुसंधान संस्थान में अर्थशास्त्र की प्रोफेसर राजेश्वरी सेनगुप्ता कहती हैं कि रुपये की वैल्यू में गिरावट करना निर्यातकों को अप्रत्यक्ष तरीके से फायदा पहुंचाएगा और भारत को प्रतिस्पर्धा में वापस लाएगा.
उन्होंने कहा, 'सरकार को मांग को बढ़ावा देने के लिए अधिक व्यापार-उन्मुख, कम संरक्षणवादी रणनीति अपनानी चाहिए. लेकिन इस तरह की रणनीतियां पहले से ही कमजोर हैं.'
भारतीय निर्यात संगठनों के महासंघ के अध्यक्ष एस.सी. रल्हन ने कहा कि सरकार को टैरिफ से प्रभावित निर्यातकों के लिए बैंक कर्ज पर एक साल की रोक लगाने का विचार करना चाहिए. इससे निर्यातकों को एक साल कर्ज चुकाने से राहत मिलेगी. इसके साथ ही कम लागत वाले कर्ज जारी करने चाहिए. कर्ज देने की प्रक्रिया को आसान बनाने पर भी विचार करना चाहिए.

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