
अमरावती हत्याकांड का कुवैत कनेक्शन आया सामने, विधायकी नहीं छोड़ना चाहते पार्थ, देखें 100 खबरें
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देश में नूपुर शर्मा के बयान के बाद होने वाली बर्बरता नहीं थम रही है. सिर तन से जुदा की एक और हिमाकत सामने आई है, अहमदनगर में नूपुर का समर्थन करने वाले युवक के गले पर धारदार हथियार से वार किया गया. 4 युवकों पर आरोप है कि उन्होंने नूपुर शर्मा के बयान का समर्थन करने पर युवक को बुरी तरह पीटा, गला काटने की कोशिश की. युवक ने इंस्टाग्राम की पोस्ट में नूपुर शर्मा के विवादित बयान का समर्थन किया था, इसी के बाद उस पर हमला हुआ, पुलिस ने चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. नोएडा की ओमेक्स सोसाइटी में महिला से बदसलूकी करने वाला श्रीकांत त्यागी अब तक गिरफ्तार नहीं हुए. पेड़ लगाने और सोसाइटी में अतिक्रमण को लेकर कहासुनी हुई थी. श्रीकांत पर कार्रवाई में पुलिस जुटी है, नेता पर पार्क में अवैध कब्जे का आरोप है. देखें 100 शहर 100 खबर.

उत्तर प्रदेश की सियासत में उल्टी गंगा बहने लगी है. मौनी अमावस्या के दिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के स्नान को लेकर हुआ विवाद अब बड़ा मुद्दा बन गया है. जहां खुद अविमुक्तेश्वरानंद के तेवर सरकार पर तल्ख हैं, तो वहीं बीजेपी पर शंकराचार्य के अपमान को लेकर समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रयागराज में संगम नोज तक पालकी पर जाकर स्नान करने से उन्हें रोका था.

झारखंड के लातेहार जिले के भैंसादोन गांव में ग्रामीणों ने एलएलसी कंपनी के अधिकारियों और कर्मियों को बंधक बना लिया. ग्रामीणों का आरोप था कि कंपनी बिना ग्राम सभा की अनुमति गांव में आकर लोगों को ठगने और जमीन हड़पने की कोशिश कर रही थी. पुलिस के हस्तक्षेप के बाद लगभग दो घंटे में अधिकारी सुरक्षित गांव से बाहर निकल सके.

दिल्ली के सदर बाजार में गोरखीमल धनपत राय की दुकान की रस्सी आज़ादी के बाद से ध्वजारोहण में निरंतर उपयोग की जाती है. प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल के बाद यह रस्सी नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाने लगी. इस रस्सी को सेना पूरी सम्मान के साथ लेने आती है, जो इसकी ऐतिहासिक और भावनात्मक महत्ता को दर्शाता है. सदर बाजार की यह रस्सी भारत के स्वाधीनता संग्राम और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बनी हुई है. देखिए रिपोर्ट.

संभल में दंगा मामले के बाद सीजेएम के तबादले को लेकर विवाद शुरू हो गया है. पुलिस के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए गए थे लेकिन पुलिस ने कार्रवाई नहीं की. इस पर सीजेएम का अचानक तबादला हुआ और वकील प्रदर्शन कर रहे हैं. समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और AIMIM ने न्यायपालिका पर दबाव बनाने का आरोप लगाया है. इस विवाद में राजनीतिक सियासत भी जुड़ी है. हाई कोर्ट के आदेशानुसार जजों के ट्रांसफर होते हैं लेकिन इस बार बहस हुई कि क्या यहां राज्य सरकार ने हस्तक्षेप किया.









