
मिडिल ईस्ट जंग के बीच जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री से की बातचीत, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक बाजार पर चर्चा
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मिडिल ईस्ट में जारी जंग को लेकर कूटनीतिक संपर्क तेज हो गए हैं और कई देश स्थिति पर नजर रखे हुए हैं. सैन्य कार्रवाई टालने की घोषणा और बातचीत को लेकर विरोधाभासी दावों ने अनिश्चितता बढ़ा दी है. ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक बाजारों पर असर को लेकर चिंता गहराती जा रही है.
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को अपने अमेरिकी समकक्ष मार्को रुबियो से फोन पर विस्तार से चर्चा की. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर जानकारी देते हुए जयशंकर ने बताया कि इस बातचीत में मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष, उसके वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर और ऊर्जा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई.
भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता है, क्योंकि खाड़ी में तनाव सीधे तौर पर तेल की आपूर्ति और कीमतों को प्रभावित करता है. विदेश मंत्री ने बताया कि दोनों देशों के बीच खास तौर पर ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर युद्ध के प्रभाव को लेकर चिंता जताई गई और आगे भी संपर्क में बने रहने पर सहमति बनी.
यह राजनयिक पहल ऐसे समय में की गई है जब अमेरिका और ईरान के बीच संभावित वार्ता को लेकर अनिश्चितता का माहौल है, और वाशिंगटन और तेहरान दोनों के बयान बिल्कुल अलग-अलग हैं.
ट्रंप के दावे पर ईरान का खंडन
सोमवार को ट्रंप ने ईरान के ऊर्जा ढांचे पर प्रस्तावित हमले को फिलहाल टालने का ऐलान किय. ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच पिछले दो दिनों में “अच्छी और सकारात्मक बातचीत” हुई है और कूटनीतिक समाधान की कोशिश जारी है. उन्होंने कहा कि बातचीत के रुख को देखते हुए सैन्य कार्रवाई कुछ समय के लिए रोकी गई है.
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बताया कि अमेरिका ने ईरान के पावर प्लांट पर हमले को 5 दिन तक टाल दिया है. इसके साथ ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत पर के नतीजे पर आगे का फैसला होगा. वहीं ट्रंप के इस ऐलान के बाद दुनिया के बाजारों में जबरदस्त उछाल आया है और कच्चे तेल की कीमतों में 11% की गिरावट आई है.

जिस अमेरिका और इजरायल ने मिलकर 28 फरवरी को ईरान पर हमले कर जंग की शुरुआत की थी, उसी अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को ये ऐलान किया कि अमेरिका अगले 5 दिनों के लिए युद्ध विराम कर रहा है यानी जंग को रोक रहा है. अब सवाल ये है कि जंग के पहले हफ्ते में जब ट्रंप ने ये दावा किया था कि ईरान की ताकत को वो पूरी तरह कुचल चुके हैं तो फिर भी ईरान इस जंग को तीसरे हफ्ते तक कैसे खींच ले गया.











