
अभिषेक बनर्जी को दिल्ली की कमान सौंपकर ममता बनर्जी ने एक तीर से कई निशाने साधे
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ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस में अंदरूनी असंतोष के मद्देनजर अभिषेक बनर्जी को दिल्ली में तैनात कर दिया है. कल्याण बनर्जी और सुदीप बंद्योपाध्याय का पत्ता काट कर नई टीम को जिम्मेदारी सौंप दी गई है - ताकि पश्चिम बंगाल चुनाव में 2021 जैसी चुनौतियों को टाला जा सके.
तृणमूल कांग्रेस में ताजा बदलाव पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के मकसद से किए जा रहे व्यापक बंदोबस्त का ही हिस्सा है. पांच साल पहले मिले सबक से सतर्क ममता बनर्जी पहले से ही पश्चिम बंगाल की राजनीतिक किलेबंदी में जुटी हुई हैं - ताकि टीएमसी की सबसे बड़ी दुश्मन बीजेपी को अव्वल तो कोई चाल चलने का मौका ही न मिले, अगर मिल भी जाए तो फटाफट स्थिति को संभाला जा सके.
बंगाल की चुनावी राजनीति में कांग्रेस को पहले ही आगाह कर चुकीं ममता बनर्जी के लिए टेंशन बढ़ाने वाली सिर्फ बीजेपी या लेफ्ट पार्टियां ही नहीं हैं, पार्टी के भीतर भी ऐसे तत्व मौजूद हैं जिनको वक्त रहते मैनेज करना निहायत ही जरूरी है. ममता बनर्जी का भाषा आंदोलन तो बीजेपी के खिलाफ है ही, बंगाली समुदाय को साथ बनाये रखने का भी कारगर उपाय है - लेकिन सबसे जरूरी हो गया था, टीएमसी नेताओं को काबू में रखना.
महुआ मोइत्रा और कल्याण बनर्जी का सार्वजनिक झगड़ा तो चुनावी रैलियों से पहले रंगारंग कार्यक्रम पेश करने वाले कलाकारों के मनोरंजन जैसा उपाय लगता है. असली लड़ाई तो पार्टी के भीतर मची हुई थी, जो तृणमूल कांग्रेस की 12 मिनट वाली वर्चुअल मीटिंग में देखी गई है - और जिसके बाद कल्याण बनर्जी और सुदीप बंद्योपाध्याय का पत्ता काट दिया गया है.
करीब पांच साल पहले टीएमसी का महासचिव बनाये जाने के बाद अभिषेक बनर्जी को बड़ा प्रमोशन मिला है. अभिषेक बनर्जी को अब सुदीप बंद्योपाध्याय की जगह टीएमसी के संसदीय दल की कमान सौंप दी गई है - लेकिन, ये काम भी ममता बनर्जी की राजनीतिक रणनीति का बेहतरीन नमूना लगता है.
तृणमूल कांग्रेस में ताजा बदलाव और उसका मकसद
खबर है कि जैसे ही कल्याण बनर्जी की भूमिका पर सवाल उठा, और काकोली घोष दस्तीदार को नई जिम्मेदारी देने की बात आई, कल्याण बनर्जी भड़क गये. कल्याण बनर्जी ने चीफ व्हिप के पद से इस्तीफा दे दिया है, और सार्वजनिक रूप से खूब भड़ास निकाली है. कल्याण बनर्जी का कहना है कि ममता दीदी ने जिन लोगों को सांसद बनाया है, उनमें से ज्यादातर लोकसभा पहुंच ही नहीं पाते. पूछ रहे हैं, मैं क्या कर सकता हूं? मेरी क्या गलती है? लेकिन हर चीज के लिए मुझे ही जिम्मेदार ठहराया जा रहा है.

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