
अपने 'सिलोविकी' सर्किल के साथ भारत आ रहे पुतिन, जानें कौन हैं रूसी राष्ट्रपति के सबसे भरोसेमंद चेहरे?
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रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अपने भारत दौरे पर आने वाले हैं. उनके साथ सात शक्तिशाली मंत्री भी पहुंचेंगे लेकिन असल दिलचस्पी उस बेहद प्रभावशाली 'सिलोविकी' सर्किल में है, जिसके सदस्य दशकों से पुतिन के सबसे भरोसेमंद सलाहकार रहे हैं. करीबी खुफिया अधिकारियों और रणनीतिकारों का यह समूह रूस की नीति और पुतिन के बड़े फैसलों को प्रभावित करता है.
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे से पहले दुनिया की नजर दो बातों पर टिकी है. पहला, उनके साथ आ रही रूसी मंत्री-परिषद, और दूसरा, पुतिन के उस बेहद चयनित और गोपनीय सर्किल पर, जिसे दुनिया "सिलोविकी" के नाम से जानती है. भारत के लिए यह दौरा महत्वपूर्ण है, लेकिन उतना ही दिलचस्प यह समझना भी है कि पुतिन किस तरह निर्णय लेते हैं और किन लोगों की सलाह पर रूस की नीतियां तय होती हैं.
पुतिन आज भारत पहुंचेंगे और उनके साथ सात प्रमुख मंत्री - रक्षा, वित्त, कृषि, आर्थिक विकास, स्वास्थ्य, आंतरिक मामले और परिवहन मंत्री मौजूद रहेंगे. केंद्रीय बैंक की चेयरपर्सन एलबिरा नबीउलिना भी इस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा होंगी. यह सूची बताती है कि रूस इस दौरे को सिर्फ कूटनीति नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था, सुरक्षा और रणनीति के व्यापक आयामों में देख रहा है.
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लेकिन असली कहानी पुतिन के 'सिलोविकी' सर्किल से शुरू होती है. सिलोविकी वे वरिष्ठ लोग हैं जिन्होंने कभी KGB जैसी सुरक्षा एजेंसियों में सेवा की और आज भी पुतिन के सबसे भरोसेमंद रणनीतिक सलाहकार माने जाते हैं.
1. सबसे पहला नाम है - निकोलाई पेत्रुशेव का, जिन्हें पुतिन का सबसे करीबी और प्रभावशाली सहयोगी माना जाता है. सुरक्षा परिषद के प्रमुख पेत्रुशेव पुतिन को पिछले 55 वर्षों से जानते हैं. दोनों ने KGB में साथ काम किया है, और रूस की आंतरिक सुरक्षा का सबसे मजबूत स्तंभ पेत्रुशेव को ही माना जाता है.
2. दूसरे नंबर पर हैं सर्गेई नारिश्किन. वे रूसी विदेश खुफिया सेवा के प्रमुख हैं और 1990 से पुतिन के साथ जुड़े हैं. KGB बैकग्राउंड, कुशल वक्तृत्व और कूटनीतिक प्रभाव के कारण उन्हें पुतिन के संभावित उत्तराधिकारियों में भी गिना जाता है.

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