
'अतीत से भाग नहीं रहा, जिया उल हक ने पाकिस्तान का जिहादीफिकेशन किया...,' बिलावल भुट्टो ने एक हफ्ते में ही दूसरी बार खोली पाक की पोल
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पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ने कहा कि अल कायदा हो या कोई और आतंकी संगठन ये सभी अफगानिस्तान जिहाद से जुड़े थे. एक बार जब अफगानिस्तान जिहाद खत्म हो गया तो कुछ समूहों ने तय किया कि वे 9/11 को अंजाम देंगे. इनमें से कुछ ग्रुप कश्मीर में जिहाद के लिए चले गए. उस समय पाकिस्तान में ऐसे कुछ लोग थे जिन्होंने इन समूहों का विरोध नहीं किया.
पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के चेयरमैन और पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी कुबूल किया है कि पाकिस्तान की धरती से जिहाद छेड़ा गया है. उन्होंने कहा है कि वे अतीत से नहीं भागना चाहते हैं और ये कहना चाहते हैं कि पाकिस्तान के पूर्व तानाशाह मुल्क का 'जिहादीफिकेशन' करने के लिए जिम्मेदार रहे हैं.
गौरतलब है कि पिछले शुक्रवार को बिलावल ने अल जजीरा टीवी से कहा था कि पाकिस्तान को परेशानी पैदा करने वाले व्यक्तियों (Person of concern) को जैसे कि लश्कर ए तैयबा के चीफ हाफिज सईद और जैश-ए-मुहम्मद प्रमुख मसूद अजहर को विश्वास बहाली के रूप में भारत को सौंपने में कोई आपत्ति नहीं है, बशर्ते कि नई दिल्ली इस प्रक्रिया में सहयोग करने की इच्छा दिखाए.
वेबसाइट द वायर के वरिष्ठ पत्रकार करण थापर को दिए एक इंटरव्यू में बिलावल भुट्टो जरदारी ने कहा कि आप जिन समूहों (जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा) की बात कर रहे हैं को न केवल पाकिस्तान के बाहर, बल्कि पाकिस्तान के भीतर भी आतंकवादी हमले करने की अनुमति हमारा देश नहीं देता है.
पहलगाम की घटना को आतंकी हमला कहा
बिलावल भुट्टो ने पाकिस्तान को आतंकवाद का भुक्त भोगी बताया और कहा कि हमने कुल मिलाकर 92,000 लोगों की जान गंवाई है. उन्होंने कहा कि मैं खुद आतंकवाद का भुक्तभोगी हूं. उन्होंने पहलगाम हमले को आतंकी हमला करार दिया और कहा कि वे पहलगाम आतंकी हमले के पीड़ितों का दर्द समझते हैं. वे उस दर्द को समझते हैं जिससे इस हमले के पीड़ितों के परिवार वाले गुजर रहे हैं.
इंटरव्यू के दौरान जब उनसे कहा गया कि उनके देश के आर्मी चीफ रहे परवेज मुशर्रफ ने खुद कहा है कि हमने आतंकियों को सपोर्ट किया और उन्हें कश्मीर में लड़ने के ट्रेनिंग दी, इसके जवाब में बिलावल भुट्टो ने कहा कि परवेज मुशर्रफ के विचारों पर उन्हें कुछ कहने की जरूरत नहीं है. लेकिन इतना कहना पर्याप्त है कि कोल्ड वार के बाद इस क्षेत्र की नीतियां ऐसी हो गई थी कि LeT जैसे संगठनों को आतंकी संगठन नहीं माना जाता था. इसके बाद 9/11 आया, इससे पहले इन ग्रुप के लोगों को आजादी के लड़ाके कहा जाता था. पाकिस्तान की सरकार ने तब अफगानिस्तान के अंदर लड़ने के लिए ऐसे संगठनों का सपोर्ट किया था. लेकिन तब भी मैं और मेरी मां इसके खिलाफ थे.

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