
अडानी को लेकर ममता बनर्जी के फैसले ने राहुल गांधी की उलझन बढ़ा दी है
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पश्चिम बंगाल में ताजपुर के गहरे समुद्री बंदरगाह को लेकर ममता बनर्जी ने जितना बड़ा झटका अडानी ग्रुप को नहीं दिया है, उससे कहीं ज्यादा मुश्किल विपक्ष और उसमें भी कांग्रेस के लिए खड़ी कर दी है. अब तो राहुल गांधी को खुल कर बताना पड़ेगा कि कांग्रेस शासित राज्यों में अडानी के कारोबार पर वो चुप क्यों रहते हैं?
ममता बनर्जी की तरफ से पहली बार अडानी ग्रुप के खिलाफ कोई अप्रत्याशित कदम उठाया गया है. पश्चिम बंगाल सरकार के ताजा कदम से भले ही उद्योगपति गौतम अडानी के कारोबार पर कोई खास असर डालने वाला न हो, लेकिन उसका दूरगामी राजनीतिक प्रभाव महसूस किया जा सकता है.
पश्चिम बंगाल ग्लोबल बिजनेस समिट में ताजपुर के गहरे समुद्री बंदरगाह प्रोजेक्ट को लेकर ममता बनर्जी खुद इस बात की घोषणा की कि इसके लिए नये टेंडर निकाले जाएंगे. ध्यान देने वाली महत्वपूर्ण बात ये भी है कि ग्लोबल बिजनेस समिट में अडानी ग्रुप का कोई प्रतिनिधि मौजूद नहीं था. सुनने में ये भी आ रहा है कि अडानी ग्रुप को बुलाया ही नहीं गया था. पिछले साल यानी 2022 के बंगाल ग्लोबल बिजनेस समिट में खुद गौतम अडानी ने भी भाग लिया था.
सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा, '...ताजपुर में प्रस्तावित गहरे समुद्र वाले बंदरगाह... टेंडर के लिए तैयार है... आप टेंडर में हिस्सा ले सकते हैं.' ये प्रोजेक्ट तीन अरब डॉलर यानी 25,000 करोड़ रुपये के निवेश के लिए है.'
वैसे तो तृणमूल सरकार की तरफ से इस मुद्दे पर ज्यादा कुछ नहीं बताया गया है. लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक, अडानी ग्रुप को ताजपुर पोर्ट को विकसित करने के लिए 25 हजार करोड़ का प्रोजेक्ट दिया गया था - और अक्टूबर, 2022 में अडानी पोर्ट्स के सीईओ करण अडानी को ममता बनर्जी ने खुद LOI (Letter of Intent) यानी आशय पत्र अपने हाथों से सौंपा था. ममता बनर्जी सरकार के इस फैसले के दो महत्वपूर्ण पहलू हैं. एक पहलू तो राज्य में निवेश से जुड़ा है, दूसरा घोर राजनीतिक है. यहां दूसरा पहलू ज्यादा महत्वपूर्ण लगता है. ऐसे में महत्वपूर्ण ये चीज नहीं है कि सरकार ने क्या कदम उठाया है, बल्कि ये है कि क्यों उठाया है? आखिर ममता सरकार ने ऐसा कदम क्यों उठाया जो बिलकुल भी अडानी के पक्ष में नहीं जाता. अडानी ग्रुप को लेकर हाल तक के ममता बनर्जी के रुख से कभी ऐसा तो लगा नहीं.
शुरुआती तौर कयास तो यही लगाये जा रहे हैं कि ये महुआ मोइत्रा केस के चलते हुआ है. कैश फॉर क्वेरी केस को लेकर टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा का कहना है कि अडानी ग्रुप के कारोबार से जुड़े सवाल संसद में पूछने के लिए ही उनके खिलाफ साजिश की गयी है.
कहीं ये सब राहुल गांधी के खिलाफ ममता बनर्जी की प्रेशर पॉलिटिक्स का हिस्सा तो नहीं है - क्योंकि अडानी ग्रुप के विरोध में ऐसे कदम तो राजस्थान और छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस के मुख्यंमंत्री भी उठा सकते थे.

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