
अचानक बंगाल-बिहार से नेपाल तक तबाही वाली बारिश क्यों हुई? खासकर फसलों के लिए ज्यादा नुकसानदेह ये बारिश
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उत्तर बंगाल में 4-5 अक्टूबर की भारी बारिश से बाढ़ और 100 लैंडस्लाइड्स, 17 मौतें हुई. सिक्किम का रास्ता कट गया है. दार्जिलिंग-जलपाईगुड़ी सबसे ज्यादा प्रभावित हैं. इस बेमौसम बरसात के पीछे बंगाल की खाड़ी का लो प्रेशर और वेस्टर्न डिस्टर्बेंस है. फसलों को भारी नुकसान हुआ है.
अचानक आई भारी बारिश ने बंगाल, बिहार से लेकर नेपाल तक तबाही मचा दी. 4 अक्टूबर की शाम से 5 अक्टूबर की सुबह तक लगातार बारिश ने उत्तर बंगाल में बाढ़ जैसी स्थिति पैदा कर दी. लैंडस्लाइड्स से 17 लोग मारे गए, सिक्किम लगभग कटा हुआ है. नेपाल में 47 से ज्यादा मौतें हुईं. बिहार के कुछ हिस्सों में भी बाढ़ का खतरा है. यह बारिश खासकर फसलों के लिए घातक साबित हो रही है, क्योंकि धान जैसी खरीफ फसलें कटाई के चरण में हैं.
यह अचानक बारिश कोई संयोग नहीं, बल्कि मौसम की प्राकृतिक प्रक्रिया का नतीजा है. इंडियन मेट्रोलॉजिकल डिपार्टमेंट (आईएमडी) के अनुसार, बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक लो प्रेशर सिस्टम (निम्न दाब क्षेत्र) बन गया. यह सिस्टम 4 अक्टूबर से सक्रिय हो गया, जिससे हवा में नमी बढ़ी और बादल तेजी से बने.
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वैज्ञानिक रूप से, लो प्रेशर का मतलब है हवा का ऊपर की ओर बहाव, जो समुद्र से नमी सोखकर भारी बारिश लाता है. इसके अलावा, उत्तर-पश्चिम भारत पर वेस्टर्न डिस्टर्बेंस का असर पड़ा. यह भूमध्य सागर से आने वाली ठंडी हवाओं का सिस्टम है, जो हिमालय के पास टकराकर भारी बारिश ट्रिगर करता है.
मॉनसून की वापसी रुकने (स्टॉल्ड मॉनसून विदड्रॉल) से भी नमी बनी रही. आईएमडी ने 4 अक्टूबर को ही भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी दी थी. जलपाईगुड़ी में 370 मिलीमीटर, दार्जिलिंग में 270 मिलीमीटर बारिश हुई. यह सामान्य से 200% ज्यादा है. नेपाल में भी इसी लो प्रेशर से फ्लैश फ्लड्स और लैंडस्लाइड्स आए.
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