
'अग्निवीरों' का चार साल बाद क्या होगा, सेना की परंपरा से खिलवाड़ कर रही मोदी सरकार? Agneepath Scheme पर उठ रहे ये सवाल
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अग्निपथ स्कीम अपने तरह की पहली योजना है जिसके तहत चार साल के लिए सैनिकों की भर्ती की जाएगी. चार बाद इन अग्निवीरों का कॉन्ट्रैक्ट खत्म हो जाएगा. इसके बाद एक चौथाई लोगों को स्थायी काडरों में भर्ती किया जाएगा. सवाल ये उठ रहे हैं कि बाकी लोगों का क्या होगा. अग्निवीरों के भविष्य पर सवाल पूछे जा रहे हैं.
भारतीय सेना की तीनों शाखाओं में सैनिकों की भर्ती के लिए नई स्कीम लॉन्च की गई है. इस स्कीम का नाम अग्निपथ है, जिसके तहत सैनिकों की भर्ती 4 साल के लिए होगी और उन्हें अग्निवीर कहा जाएगा.
केंद्रीय कैबिनेट से इस योजना को मंजूरी मिलने के बाद केंद्र सरकार के मंत्रियों से लेकर तीनों सेना प्रमुख तक, इस नई योजना की तारीफ कर रहे हैं. जबकि दूसरी तरफ विपक्ष सवाल उठा रहा है. विरोध में छात्र भी कुछ जगह सड़कों पर उतर आए हैं. तो कुछ डिफेंस एक्सपर्ट भी इस योजना से खुश नहीं हैं.
क्या है अग्निपथ स्कीम?
भारतीय सेना में पहली बार ऐसी कोई स्कीम लॉन्च की गई है, जिसमें शॉर्ट टर्म के लिए सैनिकों की भर्ती की जाएगी. इस योजना के तहत हर साल करीब 40-45 हजार युवाओं को सेना में शामिल किया जाएगा. ये युवा साढ़े 17 साल से 21 साल की उम्र के बीच के होंगे.
-ये भर्तियां मेरिट और मेडिकल टेस्ट के आधार पर की जाएंगी. -इन चार वर्षों में सैनिकों को 6 महीने की बेसिक मिलिट्री ट्रेनिंग दी जाएगी. -30-40 हजार मासिक वेतन के साथ अन्य लाभ भी दिए जाएंगे. -पहले साल में 30 हजार, दूसरे साल में 33 हजार, तीसरे साल में 36500 और चौथे साल में 40 हजार मासिक वेतन दिया जाएगा. -चार साल पूरे होने के बाद इन सभी अग्निवीरों की सेवा समाप्त हो जाएगी और फिर नई भर्तियां की जाएंगी. -सेवा समाप्त होने वाले 25 फीसदी अग्निवीरों को स्थायी काडर में भर्ती किया जाएगा.
किन बातों का हो रहा विरोध?

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