
Uttarakhand News: नदियों में घोला जा रहा हैं जहर! उत्तराखंड में नदियों को बचाने की मुहिम शुरू
ABP News
Uttarakhand News In Hindi: ब्राजील के शोध के अनुसार, दुनिया की 46 फीसदी नदियां पीने योग्य नहीं हैं, जिनमें गंगा-यमुना भी शामिल हैं. उत्तराखंड में रिस्पना जैसी नदियां कचरे से दूषित हैं.
दुनिया की 46 फीसद नदियों का पानी अब पीने और नहाने लायक भी नहीं बचा - यह चौंकाने वाला खुलासा ब्राज़ील की फेडरल यूनिवर्सिटी ऑफ साओ पाउलो के हालिया शोध में हुआ है. गंगा और यमुना जैसी पवित्र नदियां भी इस सूची में शामिल हैं. अकेले गंगा में हर साल करीब 6 लाख टन कचरा बहाया जाता है. इस खतरनाक तस्वीर के बीच उत्तराखंड में नदियों को बचाने के लिए अब सख्त मुहिम शुरू की गई है.
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में बहने वाली रिस्पना, बिंदाल, आसन और ससुआ नदियां प्लास्टिक कचरे के बोझ तले दबती जा रही हैं. कभी इन नदियों का पानी स्थानीय लोगों की प्यास बुझाता था, आज वही नदियां शहर का कचरा ढोने का जरिया बन गई हैं. नदी किनारे बसे इलाकों से लेकर औद्योगिक इकाइयों तक सब इस जल प्रदूषण के लिए जिम्मेदार माने जा सकते हैं.
उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव पराग मधुकर धकाते ने कहा कि 2027 में कुंभ का आयोजन होना है और चारधाम यात्रा भी जल्द शुरू होने वाली है. करोड़ों श्रद्धालु इन नदियों में आस्था की डुबकी लगाने आते हैं और अगर यही पानी प्रदूषित रहा तो यह न केवल स्वास्थ्य के लिए खतरनाक होगा बल्कि राज्य की छवि के लिए भी शर्मनाक होगा. उन्होंने साफ कहा कि जब तक आम आदमी की सोच नहीं बदलेगी तब तक नदियां साफ नहीं होंगी.
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अब सख्त रुख अपनाते हुए उन औद्योगिक और गैर-औद्योगिक इकाइयों पर कार्रवाई शुरू कर दी है जो नदियों में प्रदूषित पानी बहाने के लिए जिम्मेदार हैं. खासतौर पर उन होटलों को चिन्हित किया गया है जो बिना किसी ट्रीटमेंट के गंदा पानी सीधे नदियों में छोड़ देते हैं. ऐसे प्रतिष्ठानों की सूची तैयार की जा रही है और उनके खिलाफ नियमों के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी.













