
UP Election: क्या है जाटलैंड की सियासत और चौधरी चरण सिंह की विरासत का तिलिस्म?
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UP Election में सबसे ज्यादा चर्चा इस बार जाटलैंड (Jat Land) यानी पश्चिमी यूपी के सियासी समीकरणों और चौधरी चरण सिंह की सियासी विरासत की हो रही है. आखिर इसका गणित क्या है और दशकों बाद भी सभी दलों को इसी फॉर्मूले से उम्मीद क्यों है? समझिए जाटलैंड की सियासत का ऐतिहासिक बैकग्राउंड, जमीनी हकीकत और इस वोटबैंक का समीकरण.
UP Election: पश्चिमी यूपी में एक मशहूर कहावत है- जिसके जाट, उसी के ठाठ...आज जब यूपी में सत्ता का सबसे बड़ा संग्राम छिड़ा हुआ है तो ऐसे में सभी दलों की जोर आजमाइश भी चरम पर है. यूपी चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है पश्चिमी यूपी यानी जाटलैंड की सियासत को लेकर जहां पहले ही चरण में वोटिंग होनी है. 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों के बाद ये इलाका एकतरफा बीजेपी के पाले में चला गया था लेकिन हाल में हुए किसान आंदोलन ने इस इलाके के वोटों के गणित को इतना बदल दिया है कि सभी दल पहले की तरह यहां अपने लिए संभावनाएं तलाशने लगे हैं.

आज जब वक्त इतना कीमती हो गया है कि लोग हरेक चीज की दस मिनट में डिलीवरी चाहते हैं. वहीं दूसरी तरफ विडंबना ये है कि भारत का एक शहर ऐसा है जहां इंसान को कहीं जाने के लिए सड़कों पर ट्रैफिक में फंसना पड़ता है. यहां हर साल औसतन 168 घंटे लोग ट्रैफिक में फंसे रहते हैं. यानी पूरे एक हफ्ते का समय सिर्फ ट्रैफिक में चला जाता है.

जिस शहर की फायरब्रिगेड के पास छोटे से तालाब के पानी से एक शख्स को निकालने के लिए टूल नहीं है, वह किसी बड़े हादसे से कैसे निबटेगा. युवराज मेहता की मौत ने नोएडा की आपदा राहत तैयारियां की कलई खोल दी है. सवाल यह है कि जब नोएडा जैसे यूपी के सबसे समृद्ध शहर में ये हालात हैं तो बाकी शहर-कस्बों की स्थिति कितनी खतरनाक होगी.

दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता में सुधार के कारण कमीशन ऑफ एयर क्वालिटी इंप्रवूमेंट (CAQM) ने GRAP-3 पाबंदियां हटा दी हैं. AQI में सुधार के चलते अब कंस्ट्रक्शन और आवाजाही पर लगी पाबंदियों में राहत मिली है. IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले दिनों में AQI 'एवरेज' से 'खराब' श्रेणी में रह सकता है, जिसके कारण GRAP-3 के तहत गंभीर पाबंदियां लागू नहीं की जाएंगी.

AIMIM प्रवक्ता वारिस पठान ने स्पष्ट किया है कि मुसलमानों ने अब फैसला कर लिया है कि वे अब किसी भी ऐसे व्यक्ति को समर्थन नहीं देंगे जो केवल जातीय विभाजन करता है, बल्कि वे उस नेता के साथ जाएंगे जो विकास की बात करता है. उनका यह बयान समाज में सकारात्मक बदलाव और विकास को प्राथमिकता देने की दिशा में है. मुसलमान अब ऐसे नेताओं के साथ खड़े होंगे जो उनकी बेहतरी और समाज के समग्र विकास के लिए काम करें.









