
Umesh Pal Murder: साजिश, हमला और कत्ल... आठवें दिन भी खाली हैं पुलिस के हाथ, बुलडोजर तले जांच
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उमेश पाल का कत्ल 24 फरवरी को हुआ था. यानी कत्ल को आठ दिन हो गए. अब इन आठ दिनों में इस बुलडोजर वाली जांच को किनारे रख दें, तो यूपी पुलिस ने कत्ल की जांच कैसे की? जांच अभी कहां तक पहुंची? उमेश पाल के कातिलों का क्या हुआ? कत्ल का मकसद क्या था? इसको लेकर तमाम सवाल उठ रहे हैं.
यूपी के प्रयागराज में हर तरफ से देख लीजिए. हर एंगल से बुलडोजर साफ दिखाई दे जाएगा. पिछले तीन दिनों में तीसरी बार प्रयागराज में बुलडोजर चला है. सबसे ताजा बुलडोजर जिस घर को जमीदोज कर रहा है, उस घर के मालिक के बारे में दावा किया जा रहा है कि उसके खिलाफ 16 केस दर्ज हैं. बताया जा रहा है ये घर माशुकुद्दीन का है.
बुलडोजर के पहियों तले कुचलते सवाल सच्चाई ये है कि ये घर उसका नहीं बल्कि उसकी टीचर बहू का है. वो भी घर लोन पर लिया हुआ है. अब अगर पिछले तीन दिनों में इन तीन बुलडोजरों की तस्वीर आप गौर से देखेंगे, तो सिर्फ ढहते घर ही नजर आएंगे. उमेश पाल मर्डर केस की जांच का क्या हुआ? उमेश पाल के कातिल शूटर कहां छुपे हैं? उमेश पाल का कत्ल क्यों किया गया? इन सवालों के जवाब अभी पूरी तरह से नहीं मिले हैं. ऐसे में इस केस में फिलहाल की सच्चाई यही है कि उमेश पाल मर्डर केस की जांच बुलडोजर तले है.
सवालों से बच रही है पुलिस उमेश पाल का कत्ल 24 फरवरी को हुआ था. यानी कत्ल को आठ दिन हो गए. अब इन आठ दिनों में इस बुलडोजर वाली जांच को किनारे रख दें, तो यूपी पुलिस ने कत्ल की जांच कैसे की? जांच अभी कहां तक पहुंची? उमेश पाल के कातिलों का क्या हुआ? कत्ल का मकसद क्या था? इनमें से एक का भी जवाब अभी तक नहीं मिल सका है. पुलिस भी ऐसे सवालों से बचती हुई नजर आ रही है.
पुलिस की हर कहानी अतीक तक सच्चाई ये है कि पिछले आठ दिनों में उमेश पाल पर गोली और बमों से हमला करनेवाले एक भी शूटर पुलिस के हाथ नहीं लगे हैं. यानी अब तक एक भी गिरफ्तारी नहीं हुई है. सिवाय पहले दिन पकड़े गए एक वकील सदाकत के और अगले दिन हुए एक एनकाउंटर में मारे गए अरबाज के शूटरों को छोड़िए कत्ल की असली वजह यूपी पुलिस से पूछ लीजिए तो वो बगले झांकते हुए नजर आते हैं. ऐसे में वजह बताने की बजाय एक नाम पर सारा किस्सा तमाम कर देते हैं. और वो नाम है अतीक अहमद. अब जब यूपी पुलिस की जांच ही अभी बेनतीजा है, तो इस नाम पर क्या बात की जाए? लिहाजा, उसी पर बात करते हैं, जो कम से कम सामने दिखाई दे रहा है. यानी बुल्डोजर.
तीन दिन तीन तस्वीरें तीन अलग-अलग दिनों में तीन तस्वीरें सामने आई हैं और इन तीन दिनों में शासन-प्रशासन ने प्रयागराज में तीन अलग-अलग मकानों को धराशाई कर दिया गया. वैसे बताया तो ये गया कि ये मकान नियम कानूनों का उल्लंघन कर बनाए गए थे. लेकिन सच्चाई यही है कि इन तीनों ही मकानों पर चले बुलडोजरों का कनेक्शन उमेश पाल मर्डर केस से जरूर है. वरना ऐसी क्या बात थी कि पीडीए को कानून तोड़ कर बनाए जाने वाले इन मकानों की याद एकाएक आ गई और ये कार्रवाई शुरू हो गई.
PDA पर उठते सवाल पीडीए यानी प्रयागराज डेवलपमेंट अथॉरिटी ने शुक्रवार को जिस मकान को माशुकुद्दीन का बता कर जमीदोज कर डाला, उसके लिए दलील दी गई कि ये मकान एयरफोर्स की जमीन पर बना है. सवाल ये कि जब ये मकान बन रहा था, तब पीडीए कहां था? हां, ये जरूर है कि माशुकुद्दीन पर सोलह, उसके बेटे शाहजमन और शाह फतेह पर 40 और भतीजे असलूब पर दस क्रिमिनल केसेज दर्ज हैं.

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