
Sarzameen Review: बाप-बेटे के उलझे रिश्ते-मां केे त्याग के बीच झूलती है 'सरजमीं', पर दमदार है एक्टिंग
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पृथ्वीराज सुकुमारन, काजोल और इब्राहिम अली खान स्टारर सरजमीं फिल्म जियो हॉटस्टार पर 25 जुलाई से स्ट्रीम हो रही है. फिल्म को आप 5 भाषाओं में देख सकते हैं. 2 घंटे 17 मिनट की ये फिल्म आपको कितना हैरान करेगी और कितना परेशान, पढ़ें हमारे रिव्यू में.
पिता-बेटे के उलझे हुए रिश्तों की एक ऐसी कहानी, जहां मां सबसे ज्यादा सरप्राइज करती है. पृथ्वीराज सुकुमारन, काजोल और इब्राहिम अली खान स्टारर 'सरजमीं' जियो-हॉटस्टार पर स्ट्रीम हो रही है. फिल्म को कायोजे ईरानी ने डायरेक्ट किया है. वहीं धर्मा प्रोडक्शन्स और स्टार स्टूडियोज ने मिलकर इसे प्रोड्यूस किया है. तो अब बिना देरी किए इस ड्रामा फिल्म की कहानी क्या है और ये अपने पैमानों पर कितनी खरी उतरी है, आइये हम आपको बताते हैं.
क्या कहती है कहानी?
बात बिल्कुल साफ है- जैसे हर फौजी पिता चाहता है कि उसका बेटा उससे भी बड़ा अफसर बने, सबसे तेज-तर्रार हो, लोग उसे देखें तो बस कहें, 'वाह, देखो ये फलाना का बेटा है. पिता से भी आगे निकलेगा.' ऐसी ही कुछ पृथ्वीराज सुकुमारन यानी कर्नल विजय मेनन भी चाहते हैं. लेकिन उनका बेटा इब्राहिम अली खान यानी हरमन मेनन इससे बिल्कुल उलट है. उनमें जरा-सा भी सेल्फ-कॉन्फिडेंस नहीं है, वो हकलाते भी हैं. वहीं एक मां हैं काजोल यानी मेहेर जो बेटे के प्यार में सब कुछ भूल बैठी हैं. वो बस उसे प्रोटेक्ट करना चाहती है.
अब इस सोच के साथ कि मेरा बेटा कमजोर है विजय हरमन से ठीक से बात तक नहीं करता, बल्कि पब्लिकली उसे बेटे पर शर्म भी आती है. वहीं मां हर पल इसी कोशिश में है कि बाप-बेटे का रिश्ता सुधार सके. लेकिन इसी बीच विजय दो आतंकियों को पकड़ता है, जिसे छुड़ाने के लिए आतंकवादी बेटे को किडनैप कर लेते हैं. और बस यहीं से शुरू होती है भावनाओं की खींचतान.
आप पिता बने पृथ्वीराज सुकुमारन के इमोशन्स से पार पा ही रहे होते हैं कि फिल्म के क्लाईमैक्स में मां के रोल में काजोल ऐसा ट्विस्ट ला देती हैं कि वाकई हैरानी होती है. सेकेंड हाफ में हरमन एक सिक्स पैक ऐब्स वाला आतंकवादी बन चुका है लेकिन कर्नल विजय आराम से उसे घर ले आता है, मां उसकी देखभाल करती है. विजय को बेटे पर शक है लेकिन खुद आर्मी के साथी उसे ऐसा करने से रोकते हैं.
दो पहलुओं पर टकराती है फिल्म













