
Pope Francis Passes Away: दुनियाभर की चर्च पर कंट्रोल, ग्लोबल लीडर्स को देते हैं सलाह... कितना ताकतवर होता है पोप का पद
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पोप को ईसाई समुदाय का सबसे बड़ा धार्मिक गुरु कहा जाता है और उनके पास धार्मिक, प्रशासनिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक शक्तियां होती हैं. उनकी शक्तियों का दायरा काफी बड़ा है. लेकिन यह आधुनिक समय में कुछ सीमाओं के साथ आता है. वह पूरी दुनिया का आध्यात्मिक नेतृत्व करते हैं.
ईसाइयों के सबसे बड़े धर्मगुरु पोप फ्रांसिस का 88 साल की उम्र में निधन हो गया. वेटिकन ने उनके निधन की पुष्टि करते हुए बताया कि वह लंबे समय से बीमार थे. हालांकि रविवार को ही अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने पोप फ्रांसिस से मुलाकात की थी और उसके बाद वह चार दिवसीय भारत दौरे पर सोमवार सुबह दिल्ली पहुंचे हैं. पोप को हाल ही में निमोनिया हो गया था और वह इससे रिकवर कर रहे थे.
लंबे वक्त तक अस्पताल में भर्ती रहे
वेटिकल में अपने बयान में कहा कि पोप फ्रांसिस इतिहास के पहले लैटिन अमेरिकी धर्मगुरु, जिन्होंने अपनी विनम्र शैली और गरीबों के प्रति चिंता से दुनियाभर में लोकप्रियता हासिल की थी. फ्रांसिस, जो फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित थे और युवावस्था में उनके एक फेफड़े का हिस्सा निकाल दिया गया था, को 14 फरवरी, 2025 को सांस की तकलीफ के कारण जेमेली अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जो बाद में डबल निमोनिया में बदल गया. उन्होंने वहां 38 दिन बिताए, जो उनके 12 साल के पोप पद के दौरान सबसे लंबे वक्त के लिए एडमिट थे.
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उन्होंने कोरोना महामारी के दौरान दुनिया से अपील की थी कि आर्थिक और राजनीतिक ढांचे पर पुनर्विचार करने के अवसर के रूप में इस समय का इस्तेमाल करें, जिसके कारण अमीर और गरीब एक-दूसरे के खिलाफ हो गए हैं. फ्रांसिस ने मार्च 2020 में खाली पड़े सेंट पीटर्स स्क्वायर में कहा था, 'हमें एहसास हो गया है कि हम एक ही नाव पर सवार हैं, हम सभी कमज़ोर और भ्रमित हैं.' लेकिन उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि महामारी ने यह ज़रूरत दिखा दी है कि हम सभी को एक साथ नाव चलाने की ज़रूरत है, हममें से हर एक को दूसरे को सांत्वना देने की ज़रूरत है.
दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक नेता

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