
PM मोदी की पुतिन के साथ यूक्रेन पर चर्चा, एर्दोगान संग कूटनीति पर बात... वेटिंग में रह गए जिनपिंग और शहबाज
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उज्बेकिस्तान के समरकंद में 16 सितंबर को काफी सरगर्मी रही. दरअसल यहां आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष पहुंचे हुए थे. समिट के बाद पीएम मोदी रूस, तुर्की, ईरान और मेजबान देश उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति से मिले. इस दौरान उन्होंने आपसी रिश्तों को बेहतर बनाने के साथ-साथ कई अहम मुद्दों पर चर्चा की.
उज्बेकिस्तान के समरकंद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ द्विपक्षीय वार्ता की. मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी, उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव से कई अहम मुद्दों पर बात की.
इसके अलावा एससीओ समिट में एक और अच्छी तस्वीर देखने को मिली. तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात हुई. यह मुलाकात इसलिए अहम है क्योंकि पाकिस्तान की वजह से भारत और तुर्की के संबंध अक्सर तनावपूर्ण रहते हैं. पाकिस्तान मुस्लिम देश तुर्की को सऊदी अरब से भी बड़ा दोस्त मानता है.
हालांकि दिनभर यह भी चर्चा होती रही कि पीएम मोदी की चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ के साथ भी द्विपक्षीय मुलाकात हो सकती है लेकिन दोनों ही नेता वेटिंग में रहे गए और मुलाकात नहीं हुई. भारत के विदेश सचिव विनय मोहन क्वात्रा ने बताया कि सभी बैठकें जो निर्धारित की गई थीं या जिनके लिए हमारे पास अनुरोध आए थे, उन पर हमने विचार किया था.
मोदी पुतिन से बोले- आज का युग युद्ध का नहीं
समरकंद में रूस के राष्ट्रपति पुतिन से मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ये युग युद्ध का नहीं है. पीएम मोदी ने कहा कि इस मुद्दे पर मैंने आपसे बात की थी. आज हम इस पर बात करना चाहेंगे कि शांति के रास्ते पर आगे कैसे बढ़ा जा सके. भारत और रूस कई दशकों तक एक साथ रहे हैं.
इसके बाद राष्ट्रपति पुतिन ने पीएम मोदी से कहा कि मैं यूक्रेन संघर्ष पर आपकी स्थिति जानता हूं. मैं आपकी चिंता समझता हूं. मैं जानता हूं कि आप इन चिंताओं को समझते हैं. हम चाहते हैं कि ये संकट जितना जल्दी हो सके खत्म हो. लेकिन जो दूसरी पार्टी है- यूक्रेन, वे संवाद प्रक्रिया में शामिल ही नहीं होना चाहते हैं. वे कहते हैं कि वे अपने लक्ष्यों को युद्ध के मैदान में हासिल करना चाहते हैं. हम इस बारे में पूरी गतिविधि से आपको अवगत कराते रहेंगे.

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