
'PM की अध्यक्षता वाला पैनल ही करेगा चुनाव आयुक्त की नियुक्ति', विरोध में दायर की गई याचिका पर रोक लगाने से SC का इनकार
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जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता की पीठ ने एक गैर सरकारी संगठन, एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) द्वारा दायर याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी किया और मामले को अप्रैल में सुनवाई के लिए इस मुद्दे पर अन्य लंबित याचिकाओं के साथ सूचीबद्ध किया.
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को नए कानून के क्रियान्वयन पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति एक पैनल द्वारा करने का प्रावधान है. इस पैनल में भारत के मुख्य न्यायाधीश शामिल नहीं हैं. जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता की पीठ ने एक गैर सरकारी संगठन, एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) द्वारा दायर याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी किया और मामले को अप्रैल में सुनवाई के लिए इस मुद्दे पर अन्य लंबित याचिकाओं के साथ सूचीबद्ध किया.
याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यालय की अवधि) अधिनियम, 2023 की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है. एनजीओ की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि कानून शीर्ष अदालत की संविधान पीठ के फैसले के विपरीत है जिसने निर्देश दिया था कि CJI उस पैनल में होंगे जो सीईसी और ईसी की नियुक्ति करेगा. उन्होंने कहा कि दो चुनाव आयुक्त सेवानिवृत्त होने वाले हैं और यदि कानून के क्रियान्वयन पर रोक नहीं लगाई गई तो याचिका निरर्थक हो जाएगी.
अदालत में आज सुनवाई के दौरान जब प्रशांत भूषण ने अंतरिम रोक पर जोर दिया तो पीठ ने कहा, 'हम आपको इस मामले में अंतरिम राहत नहीं दे सकते. संवैधानिक वैधता का मामला कभी भी निरर्थक नहीं होता. हम अंतरिम राहत देने के लिए अपने मापदंडों को जानते हैं.'
नए कानून में क्या है?
बता दें कि नए कानून के मुताबिक, 'मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा एक चयन समिति की सिफारिश पर की जाएगी. इस पैनल की अध्यक्षता प्रधानमंत्री करेंगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता और प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री इस पैनल के सदस्य होंगे.'
याचिका के विरोध में क्या कहा गया?

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