
PAK में निकला नया 'जमील जमाली'? जिसके इशारे पर बंद होता था कराची, मगर अपना देश छोड़कर जाना पड़ा
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आदित्य धर की फिल्म धुरंधर 2 लोगों को पसंद आई है. हर ओर जमील जमाली के किरदार की चर्चा हो रही है. इसे लेजेंडरी एक्टर राकेश बेदी ने बेहद खूबसूरती के साथ निभाया है. लेकिन क्या आप जानते हैं रियल लाइफ में जमील जमाली कौन है?
धुरंधर 2 की बॉक्स ऑफिस पर ऐसी बादशाहत चमकी कि हर कोई इसी फिल्म की बात कर रहा है. इसके ज्यादा किरदार रियल शख्सियतों से प्रेरित हैं. मेकर्स ने रील किरदारों को हूबहू रियल कैरेक्टर्स जैसा लुक दिया. राकेश बेदी ने फिल्म में जमील जमाली के रोल में लाइमलाइट लूटी. फिल्म रिलीज के बाद से हर कोई यही तलाश रहा है कि रियल जमील जमाली आखिर है कौन?
धुरंधर पार्ट 1 की रिलीज के बाद पाकिस्तानी नेता नबील गबोल ने सामने आकर सस्पेंस खत्म किया. उन्होंने कई इंटरव्यूज में दावा किया कि जमील जमाली का रोल उनसे प्रेरित है. उनका लुक देखकर लोगों को भी लगा कि वो ही रियल जमील जमाली हैं. मगर धुरंधर 2 आने के बाद जिस तरह नबील ने अपने रोल से पल्ला झाड़ा है वो हैरानी भरा है. इस बीच इंटरनेट पर एक नए शख्स का नाम सामने आया है, जिसे रियल जमील जमाली कहा जा रहा है. ये नाम है पाकिस्तान के निर्वासित नेता अल्ताफ हुसैन का है. जानते हैं कौन हैं कराची के 'भाई' कहे जाने वाले अल्ताफ हुसैन...
कराची में चलती थी अल्ताफ हुसैन की हुकूमत? अल्ताफ पाकिस्तान की राजनीतिक पार्टी मुत्तहिदा कौमी मूवमेंट (MQM) के फाउंडर हैं. वो भारत-पाक के बंटवारे के बाद पाकिस्तान में बस गए थे. उनका जन्म 1953 में हुआ था. उनका परिवार यूपी से था, जो कि विभाजन के बाद पाकिस्तान चला गया था. कॉलेज के वक्त से उन्हें राजनीति में इंटरेस्ट था. अल्ताफ मुहाजिरों के अस्तित्व को बचाने के लिए हमेशा से अपनी आवाज उठाते रहे. मुहाजिर, उन मुस्लिमों को कहा जाता है जो बंटवारे के बाद पाकिस्तान में खासकर कराची में जाकर बसे. अल्ताफ भी उन्हीं में से एक हैं. मुहाजिरों के लिए आवाज को बुलंद करने के लिए अल्ताफ ने 1984 में MQM पार्टी बनाई. उनकी पार्टी को कराची के लोगों का जबरदस्त समर्थन मिला. दशकों तक कराची पर अल्ताफ की पार्टी का दबदबा रहा. उनकी दंबगई कराची में बढ़ने लगी. पूरे कराची में उनका सिक्का चलता था. उनके एक इशारे पर कराची जैसा बड़ा शहर बंद हो जाता था.
अल्ताफ की एक आवाज पर शहर में कर्फ्यू जैसे हालात बन जाते थे. अल्ताफ का लोगों में ऐसा खौफ था कि उनके खिलाफ बोलने से पहले हर कोई 100 बार सोचता था. कराची की हर दुकान, घर पर अल्ताफ की ही फोटो दिखती थी. ये भी कहा जाता है कि ल्यारी में रहमान डकैत और बाकी गैंगस्टरों को इसलिए मजबूती दी गई ताकि अल्ताफ और उसकी पार्टी का खात्मा किया जा सके. अल्ताफ हुसैन के खिलाफ हत्या के दर्जनों केस दर्ज हुए. बात इतनी आगे बढ़ी कि उन्हें 1992 में पाकिस्तान छोड़कर ब्रिटेन में शरण लेनी पड़ी. इस दौरान उन्हें जान से मारने की कई मरतबा कोशिश हुई. तब से लेकर आज तक वो ब्रिटेन में ही रहते हैं. उनके पास ब्रिटिश नागरिकता है. विदेश में बसने के बाद भी कराची में उनका दबदबा चला. फिर 2014 में ऐसा दौर आया जब अल्ताफ का रुतबा कराची में कम होने लगा. 2025 में अल्ताफ ने पीएम नरेंद्र मोदी से मुहाजिरों को बचाने, उनकी रक्षा करने की अपील की थी. अल्ताफ आज 72 साल के हैं.
इंटरनेट पर अल्ताफ का लुक देखकर लोगों को उनमें और राकेश बेदी में सिमिलैरिटी नजर आ रही है. कहा जाता है राकेश बेदी ने जमील जमाली का रोल प्ले करने के लिए अल्ताफ के स्पीच स्टाइल, मैनर्स और बॉडी लैंग्वेज को स्टडी किया था. दावा है अल्ताफ ने 48 की उम्र में शादी की थी. अब उनका तलाक हो चुका है. उनकी एक बेटी है. कई रिपोर्ट्स में बताया गया है कि अल्ताफ पर भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ से संपर्क रखने के आरोप थे. जिसकी वजह से उन्हें पाकिस्तान से निकाला गया. हालांकि इन दावों में कितनी सच्चाई है इसकी हम पुष्टि नहीं करते. वहीं जमील जमाली के किरदार से जिस तरह अल्ताफ को जोड़ा जा रहा है, इसे लेकर उनका कोई रिएक्शन नहीं आया है.

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