
Mrityu Panchak 2022: 23 जून तक लगा है 'मृत्यु पंचक', भूलकर भी ना करें ये 4 गलतियां
AajTak
Mrityu Panchak 2022: ज्योतिषियों के मुताबिक, हर महीने ऐसे पांच दिन आते हैं जिनमें शुभ कार्य वर्जित होते हैं. इन्हें ही पंचक कहा जाता है. कुछ पंचक बेहद अशुभ माने जाते हैं जिनमें 'मृत्यु पंचक' भी है. दरअसल, शनिवार के साथ शुरू होने वाले पंचक को मृत्यु पंचक कहा जाता है. मृत्यु पंचक को बेहद अशुभ समझा जाता है.
पंचक का हिंदू धर्म में विशेष महत्व बताया गया है. ज्योतिषियों के मुताबिक, हर महीने ऐसे पांच दिन आते हैं जिनमें शुभ कार्य वर्जित होते हैं. इन्हें ही पंचक कहा जाता है. कुछ पंचक बेहद अशुभ माने जाते हैं जिनमें 'मृत्यु पंचक' भी है. दरअसल, शनिवार के साथ शुरू होने वाले पंचक को मृत्यु पंचक कहा जाता है. मृत्यु पंचक को बेहद अशुभ समझा जाता है.
कब लगता है पंचक? ज्योतिष गणना के अनुसार, जब चंद्रमा धनिष्ठा नक्षत्र के तृतीय चरण और शतभिषा नक्षत्र, उत्तराभाद्रपद नक्षत्र, रेवती नक्षत्र, और पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र, में भ्रमण करता है तो इस अवधि को पंचक कहा जाता है. पंचक कुल पांच दिन के होते हैं. इसके अलावा, चंद्रमा जब कुंभ या मीन राशि में प्रवेश करता है तो पंचक की शुरुआत होती है.
कब से कब तक रहेगा मृत्यु पंचक 15 जून से आषाढ़ माह शुरू हो गया है. शनिवार, 18 जून से पंचक की शुरुआत भी हो गई है. अब अगले 5 दिनों तक मृत्यु पंचक रहने वाला है. यानी मृत्यु पंचक शनिवार, 18 जून से लेकर गुरुवार, 23 जून तक रहने वाला है. पंचक 23 जून को सुबह 6 बजकर 14 मिनट पर समाप्त हो जाएगा. इस दौरान कुछ विशेष बातों पर ध्यान देना बहुत जरूरी होता है.
पंचक काल में भूलकर भी ना करें ये कार्य पंचक काल में लकड़ी इकट्ठा करना या खरीदना बहुत अशुभ माना जाता है. इसके अलावा, घर में पलंग या चारपाई बनवाना या मकान की छत बनवाने की भी मनाही होती है. पंचक में दक्षिण दिशा की ओर यात्रा करना वर्जित माना गया है. दरअसल, इसे यम की दिशा माना गया है.

Chaitra Navratri 2026 Durga Ashtami: चैत्र नवरात्र की दुर्गाष्टमी बहुत ही महत्वपूर्ण तिथि मानी जाती है. इस दिन छोटी कन्याओं का पूजन करने से मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त होता है. आज कन्या पूजन के लिए 3 मुहूर्त प्राप्त होंगे. जिसमें पहला मुहूर्त आज सुबह 6 बजकर 16 मिनट से शुरू होगा और समाप्त 7 बजकर 48 मिनट पर होगा.

Chaitra Navratri 2026: देवी कवच पाठ का रहस्य यह है कि इसमें नकारात्मक ऊर्जा को सकारात्मक ऊर्जा में बदलने और साधक को सभी प्रकार की बुराइयों, अकाल मृत्यु, रोग, शत्रुओं, और मुकदमों जैसी बाधाओं से बचाने की अद्भुत शक्ति है. यह कवच मार्कंडेय पुराण का हिस्सा है, जो दुर्गा सप्तशती के अंतर्गत आता है, और इसका पाठ करने से मन शांत होता है, बुद्धि सुरक्षित रहती है, और धन, मान, तथा सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है.

Chaitra Navratri 2026 Diet: फलाहार थाली, व्रत वाली टिक्की-चाट... क्या आप भी ऐसे कर रहे हैं फास्टिंग?
Chaitra Navratri 2026 Diet: अक्सर भूख के कारण लोग फलाहार के नाम पर व्रत में पूरे दिन खाते रहते हैं. लेकिन, नवरात्र के व्रत में कितना खाएं, यह जानना बेहद जरूरी है. क्योंकि फलाहार के नाम पर ज्यादा खाना सेहत पर भारी पड़ सकता है.










