
MP-छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के जातिगत जनगणना कार्ड से निपटने के लिए BJP का 'ट्रिपल-M' फॉर्मूला!
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कांग्रेस ने राजस्थान से लेकर मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में सत्ता में आने पर जातिगत जनगणना कराने का वादा किया है. कांग्रेस के इस दांव की काट के लिए बीजेपी 'ट्रिपल-M' फॉर्मूले पर बढ़ती दिख रही है. क्या है ये फॉर्मूला?
राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनाव में इस बार जातिगत जनगणना का शोर है. कांग्रेस ने हर चुनावी राज्य में सत्ता में आने पर जातिगत जनगणना कराने का वादा किया है. 'ग्रैंड ओल्ड पार्टी' ने जातिगत जनगणना का वादा अपने घोषणा पत्र में तो किया ही, पार्टी की रैलियों में भी इसकी गूंज सुनाई दी.
राजस्थान में 25, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में 17 नवंबर को वोटिंग होनी है. राजस्थान और मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी की आबादी अनुमानों के मुताबिक 50 फीसदी के करीब है. छत्तीसगढ़ में ओबीसी आबादी 44 फीसदी के करीब होने के अनुमान हैं. जातिगत जनगणना के दांव से कांग्रेस ओबीसी मतदाताओं को अपने पाले में लाने की कोशिश में है. वहीं, मतदान की तिथि करीब आते ही भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) भी इसे लेकर एक्टिव मोड में आ गई है.
बीजेपी, कांग्रेस के जातिगत जनगणना के दांव की काट के लिए 'ट्रिपल एम' फॉर्मूला आजमाती नजर आ रही है. बीजेपी का सीएम फेस घोषित किए बगैर चुनाव मैदान में उतरने का फैसला हो या घोषणा पत्र का नया नाम या गृह मंत्री अमित शाह जैसे वरिष्ठ नेताओं का चुनावी रैलियों में संबोधन. सबकुछ इसी फॉर्मूले के इर्द-गिर्द होता नजर आ रहा है.
क्या है बीजेपी का 'ट्रिपल एम' फॉर्मूला?
बीजेपी का ट्रिपल एम फॉर्मूला है- मोदी, मंत्रियों की संख्या और मंडल कमीशन. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद भी ओबीसी से ही आते हैं और पार्टी इसे चुनाव प्रचार में जोर-शोर से बता रही है. बीजेपी के नेता चुनावी रैलियों में जगह-जगह ये जिक्र कर रहे हैं कि नरेंद्र मोदी ओबीसी वर्ग से ही आते हैं.
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