
Mission Gaganyaan: मिशन गगनयान में पहला ट्रायल खाली होगा और दूसरे में महिला रोबोट
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Mission Gaganyaan: मिशन गगनयान के तहत ISRO तीन अंतरिक्षयात्रियों को पृथ्वी से 400 किमी ऊपर अंतरिक्ष में सात दिन की यात्रा कराएगा. इन अतंरिक्ष यात्रियों को सात दिन के लिए पृथ्वी की लो-ऑर्बिट में चक्कर लगाना होगा. इस मिशन के लिए ISRO ने भारतीय वायुसेना से अंतरिक्षयात्री चुनने के लिए कहा था.
Mission Gaganyaan: भारत के मिशन गगनयान का पूरा प्लान सामने आ गया है. प्लान के मुताबिक, गगनयान का पहला ट्रायल खाली होगा जबकि दूसरे ट्रायल में एक महिला रोबोट भेजी जाएगी. ये दोनों ट्रायल इस साल के अंत तक पूरे कर लिए जाएंगे. दोनों ट्रायल के आधार पर तीसरा ट्रायल होगा जिसमें दो लोगों को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा.
केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉक्टर जितेंद्र सिंह ने मिशन गगनयान के प्लान की पूरी जानकारी दी है. उन्होंने बताया कि दूसरे ट्रायल में जिस महिला रोबोट को भेजा जाएगा, उसका नाम व्योम मित्र रखा गया है. इस रोबोट को इसरो (ISRO) ने डेवलप किया है.
इससे पहले केंद्रीय मंत्री ने कहा था कि यह भारत का इकलौता अंतरिक्ष मिशन है. गगनयान स्पेस फ्लाइट मिशन के तहत अंतरिक्ष यात्रियों को स्पेस में भेजा जाएगा. इसमें पहला टेस्ट 2022 के बीच में होगा. पहले चरण में गगनयान का मानव रहित मिशन G1 होगा. इसके बाद 2022 के अंत में व्योममित्र नाम का रोबोट भेजा जाएगा. जितेंद्र सिंह ने ये भी कहा कि इस गगनयान लॉन्च के लिए 500 से ज्यादा इंडस्ट्री शामिल हैं. इसके लिए कई रिसर्च मॉड्यूल बनाए गए हैं, जिसमें भारत में निर्मित रिसर्च मॉड्यूल भी शामिल है.
गगनयान के लिए IAF के चार पायलट्स ने रूस में पूरी की ट्रेनिंग
गगनयान के लिए भारतीय वायुसेना के चार पायलट्स ने रूस के गैगरीन कॉस्मोनॉट्स ट्रेनिंग सेंटर में अपनी ट्रेनिंग पूरी कर ली है. इन्हें मॉस्को के नजदीक जियोजनी शहर में स्थित रूसी स्पेस ट्रेनिंग सेंटर में एस्ट्रोनॉट्स बनने की ट्रेनिंग दी गई थी. इन्हें गगननॉट्स (Gaganauts) बुलाया जाएगा. इन चार गगननॉट्स में ट्रेनिंग पूरी करने वाले इंडियन एयरफोर्स के एक ग्रुप कैप्टन हैं जबकि तीन विंग कमांडर हैं. फिलहाल इन्हें बेंगलुरू में गगनयान मॉड्यूल की ट्रेनिंग दी जाएगी.
अंतरिक्ष में कितने दिन की यात्रा करेंगे भारतीय

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