
LPG शॉर्टेज पर संसद में विपक्ष का प्रोटेस्ट, कांग्रेस की डिमांड- तत्काल कदम उठाए सरकार
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घरेलू गैस की शॉर्टेज को लेकर विपक्षी दल सरकार से तत्काल प्रभावी कदम उठाने की डिमांड कर रहे हैं. विपक्षी दलों के नेता घरेलू गैस को लेकर बने हालात गंभीर बता रहे हैं. वहीं, सत्ताधारी एनडीए के नेताओं का आरोप है कि विपक्ष लोगों को गुमराह कर रहा है.
देश के अलग-अलग राज्यों, अलग-अलग शहरों में एलपीजी सिलेंडर की शॉर्टेज के मुद्दे पर विपक्षी दलों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है. पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने एक दिन पहले लोकसभा में इसे लेकर बयान देते हुए दावा किया था कि देश में घरेलू गैस की कोई कमी नहीं है. उन्होंने एलपीजी सिलेंडर को लेकर संभावित संकट से निपटने के लिए सरकार की ओर से उठाए जा रहे कदम भी गिनाए थे. विपक्षी दलों ने शुक्रवार को भी संसद में इस मुद्दे पर प्रोटेस्ट किया.
विपक्षी दल यह मांग कर रहे हैं कि एलपीजी शॉर्टेज से निपटने के लिए केंद्र सरकार तत्काल प्रभावी कदम उठाए. केरल के तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस के सांसद शशि थरूर ने एलपीजी सिलेंडर की किल्लत, खासकर ग्रामीण इलाकों में हो रही परेशानी को गंभीर चिंता का विषय बताया और केंद्र सरकार के प्रयासों पर संतोष भी व्यक्त किया. उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में लोग गैस सिलेंडर छोड़कर फिर से लकड़ी और कोयले का इस्तेमाल करने लगे हैं. यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है. कुछ जगहों पर गैस सिलेंडर की कमी के कारण रेस्टोरेंट बंद हो रहे हैं.
शशि थरूर ने कहा कि हम सभी इस तरह की स्थिति में साथ हैं. देश को एकजुट होकर इन समस्याओं से जल्द निपटना होगा. उन्होंने यह भी कहा कि पांच राज्यों में चुनाव होने हैं और चुनाव प्रचार के दौरान नेताओं को भी पेट्रोल की जरूरत होती है. वह जिन रेस्टोरेंट्स में जाते हैं, वह भी पर्याप्त गैस सिलेंडर न होने के कारण बंद हो रहे हैं. शशि थरूर ने यह भी कहा कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा और खाड़ी देशों में रहने वाले करीब 90 लाख भारतीयों की सुरक्षा पर भी इस युद्ध का गंभीर असर पड़ सकता है.
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कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने कहा कि सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए कि जमीनी स्तर पर घरेलू गैस की आपूर्ति सुचारू रहे. उन्होंने कहा कि असली परीक्षा जमीनी स्थिति से होती है. अगर व्यावसायिक प्रतिष्ठान और घरेलू उपभोक्ता मांग के मुताबिक गैस पाने में सफल हैं, तो पैनिक नहीं होगा. कार्ति चितंबरम ने कहा कि सरकार को सप्लाई चेन पर ध्यान देना चाहिए और घरों-प्रतिष्ठानों, दोनों के लिए ही पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करनी चाहिए. टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने भी हालात पर चिंता जताई.
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ईरान युद्ध के कारण उभरते ऊर्जा संकट के बीच केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में तेल की कोई कमी नहीं है. सरकार ने जनता से अपील की है कि वे खुले कंटेनरों में तेल न लें और पेट्रोल पंप की गाइडलाइन का कड़ाई से पालन करें. यह निर्देश ईंधन संकट के समय आपूर्ति को सुनिश्चित करने के लिए जारी किया गया है. सरकार इस बात पर जोर देती है कि कोई आवश्यकता से अधिक तेल स्टॉक न करें ताकि बाजार में तेल की उपलब्धता बनी रहे और आम जनता को परेशानी न हो.

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