Lacey Fletcher: 12 साल तक सोफे से चिपकी रही लड़की, लाश देखकर पुलिस की भी कांप गई रूह
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क्या कोई अपनी ही बच्चे की हत्या कर सकता है? वो भी सिर्फ इसलिए क्योंकि वह कोई गंभीर बीमारी से पीड़ित है. लेकिन 2022 में अमेरिका के लुसियाना में पुलिस ने ऐसे ही दंपति को गिरफ्तार किया जिसने अपनी ही बेटी को धीरे-धीरे करके मौत के घाट उतार दिया. जब पुलिस को लड़की की लाश मिली तो उनके भी रोंगटे खड़े हो गए. क्योंकि उसकी हालत दंपति ने ऐसी कर दी थी कि किसी की भी रूह कांप जाए.
तारीख, 3 जनवरी 2022... जगह अमेरिका का लुसियाना स्टेट (Louisiana, America) ... यहां एक छोटे सा कस्बा है जिसका नाम स्लॉटर (Slauter) है. जहां सिर्फ 900 के करीब लोग रहते हैं. यहां रहने वाली 64 वर्षीय शीला फ्लेचर (Sheila Fletcher) नामक महिला ने इस दिन पुलिस को फोन किया और रोते हुए बताया कि उसकी बेटी लेसी फ्लेचर (Lacey Fletcher) की मौत हो गई है. उसने बताया कि मैं और मेरे पति (Clay Fletcher) कहीं घूमने गए थे. लेकिन जब लौटे तो घर में हमें हमारी 36 साल की बेटी लेसी की लाश मिली.
सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची. फिर शीला और क्ले पुलिस को घर के अंदर लेकर गए. जब पुलिस ने कमरे में देखा तो उनके होश उड़ गए. क्योंकि कमरे से बहुत ही तेज बदबू आ रही थी और वहीं सोफे पर एक लाश पड़ी थी, जो कि लेसी की थी. पुलिस हैरान इसलिए थी क्योंकि लाश ही हालत ही कुछ ऐसी थी कि किसी के भी रोंगटे खड़े हो जाएं. वो लाश सोफे से ऐसे चिपकी हुई थी जैसे वह सोफे का ही एक हिस्सा हो. लाश बिल्कुल गल चुकी थी, जिससे सोफे में लाश का आधा हिस्सा धंस गया था.
यही नहीं, लाश के ऊपर कई कीड़े भी रेंग रहे थे. उसे देखकर ऐसा लग रहा था मानो वह लाश कई समय से ऐसे ही सोफे पर पड़ी हुई है. लाश के शरीर पर लाल रंग के कई निशान थे जिससे लग रहा था जैसे उसे कोई गंभीर बीमारी हुई हो. लाश की ऐसी हालत देखकर पुलिस वालों को भी उल्टी आने लग पड़ी. फिर भी उन्होंने हिम्मत जुटाई और लाश को जैसे तैसे बाहर निकाला. जब उसका वजन किया गया तो वह सिर्फ 27 किलोग्राम निकला.
12 सालों से सोफे पर थी लेसी इसके बाद लाश का पोस्टमार्टम करवाया गया, जिसमें पता चला कि लेसी की मौत भुखमरी और अल्सर के बाद सेप्सिस नामक गंभीर बीमारी के कारण हुई है. जब लेसी के माता-पिता से इसे लेकर पूछताछ की गई तो उन्होंने बेहद चौंकाने वाली बात पुलिस को बताई. उन्होंने बताया कि उनकी बेटी पिछले 12 सालों से ऐसे ही सोफे पर पड़ी हुई थी. दंपति ने बताया कि उन्हें याद भी नहीं है कि अंतिम बार उन्होंने लेसी को हिलते-डुलते कब देखा था. उसके शरीर में कुछ हिलता था तो वह थी उसकी आंखें. वो बोल भी नहीं पाती थी. बस आंखों के इशारों से बताती थी कि उसे क्या चाहिए. वह सोफे पर ही मल-मूत्र करती थी.
गंभीर बीमारी से पीड़ित थी लेसी दंपति ने बताया कि उनकी बेटी एक अजीब बीमारी से ग्रसित थी, जिसे लॉक्ड-इन सिंड्रोम (Locked-in syndrome) कहते हैं. ये ऐसी रेयर बीमारी है जिसके अंदर व्यक्ति की लगभग सारी मांसपेशियां काम करना बंद कर देती हैं सिर्फ आंखों की मांसपेशियों को छोड़कर. इसमें व्यक्ति का शरीर एक जिंदा लाश जैसा बनकर रह जाता है. अब यहां पुलिस को साफ हो गया था कि लेसी की अगर हत्या हुई भी है तो इसमें बाहर वाले किसी भी इंसान का हाथ नहीं हो सकता. क्योंकि वह तो पिछले 12 सालों से घर के अंदर ही पड़ी थी. उसका बाहर के लोगों के साथ कोई कॉन्टेक्ट था ही नहीं.
माता-पिता पर हुआ हत्या का शक फिर पुलिस को सीधे क्ले और शीला पर ही लेसी की हत्या का शक हुआ. उन्होंने दंपति को सामने बैठाकर पूछताछ शुरू की. उन्होंने बताया कि 12 साल पहले जब हमें पता चला कि लेसी लॉक्ड-इन सिंड्रोम से पीड़ित है तो हमने उसका इलाज करवाने की कोशिश की. लेकिन जब कोशिश कामयाब नहीं हुई तो हम लेसी को घर ले आए. फिर हमने उसे इसी सोफे पर रख दिया. हम उसका घर पर ही ध्यान रखने लगे. उसे जो कुछ भी चाहिए होता था हम उसे यहीं लाकर दे देते थे.

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