
Kuno National Park: जानिए सिर्फ 2 चीतों को ही क्यों बड़े बाड़े में छोड़ा गया, बाकी 6 कब छूटेंगे
AajTak
मध्य प्रदेश के श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क (Kuno National Park) में दो चीतों को बड़े बाड़े में छोड़ दिया गया है. इन दोनों चीतों ने पहले दिन रविवार को खुले जंगल में मस्ती की, बल्कि कई बार चीतल और सांभर को देख तेज रफ्तार से दौड़ लगाई. नेशनल पार्क प्रबंधन का कहना है कि अन्य चीतों को छोड़ने का फैसला टास्क फोर्स करेगी.
मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क (Kuno National Park) में शनिवार शाम 2 चीतों को बड़े बाड़े में छोड़ दिया गया था. इसके बाद से ही सवाल उठ रहे हैं कि आखिर बाकी बचे 6 चीतों को कब छोड़ा जाएगा. नेशनल पार्क प्रबंधन के मुताबिक, चीतों के लिए बनाई गई टास्क फोर्स ही तय करेगी कि उन्हें कब बड़े बाड़े में छोड़ना है.
कूनो नेशनल पार्क में 5 वर्ग किमी का बड़ा बाड़ा बनाया गया, जहां 2 चीतों को छोड़ दिया गया है. इससे पहले सभी चीतों को क्वारंटाइन बाड़े में रखा गया था. टास्क फोर्स समिति जल्द ही अब चरणबद्ध तरीके से बाकी चीतों को छोड़ने की रणनीति पर काम कर रही है.
टास्क फोर्स और विशेषज्ञ बड़े बाड़े में छोड़े गए इन दोनों चीतों पर सतत नजर रख रही है. जब टास्क फोर्स इस बात से संतुष्ट हो जाएगी कि यह दोनों चीते पूरी तरह से कूनो के परिवेश में ढल गए हैं और अब इन्हें किसी अन्य जीव से खतरा नहीं है, इसके बाद बाकी चीतों को भी चरणबद्ध तरीके से छोड़ा जाएगा.
डीएफओ बोले- छोड़े गए चीतों का व्यवहार अभी तक सामान्य
Kuno National Park के डीएफओ प्रकाश वर्मा का कहना है कि टास्क फोर्स समिति द्वारा क्वारंटाइन 8 चीतों में से 2 चीतों को छोड़ दिया है, जिनका शनिवार से लेकर अभी तक सामान्य व्यवहार नजर आया है. साथ ही चीतों ने सोमवार सुबह चीतल का शिकार भी कर किया.
डीएफओ ने कहा कि टास्क फोर्स समिति के द्वारा बताए गए कार्यों को प्रबंधन द्वारा जल्द पूर्ण कर लिया जाएगा. विशेषज्ञों ने बड़े बाड़े के सीसीटीवी कैमरों के साथ ही ड्रोन कैमरे के जरिए इन चीतों की मॉनीटरिंग की, जिसमें पाया गया कि दोनों चीतों ने बाड़े में खूब उछलकूद की और दोनों का व्यवहार भी बेहतर नजर आया. इससे लग रहा है कि चीतों को कूनो का जंगल रास आ रहा है.

आज जब वक्त इतना कीमती हो गया है कि लोग हरेक चीज की दस मिनट में डिलीवरी चाहते हैं. वहीं दूसरी तरफ विडंबना ये है कि भारत का एक शहर ऐसा है जहां इंसान को कहीं जाने के लिए सड़कों पर ट्रैफिक में फंसना पड़ता है. यहां हर साल औसतन 168 घंटे लोग ट्रैफिक में फंसे रहते हैं. यानी पूरे एक हफ्ते का समय सिर्फ ट्रैफिक में चला जाता है.

जिस शहर की फायरब्रिगेड के पास छोटे से तालाब के पानी से एक शख्स को निकालने के लिए टूल नहीं है, वह किसी बड़े हादसे से कैसे निबटेगा. युवराज मेहता की मौत ने नोएडा की आपदा राहत तैयारियां की कलई खोल दी है. सवाल यह है कि जब नोएडा जैसे यूपी के सबसे समृद्ध शहर में ये हालात हैं तो बाकी शहर-कस्बों की स्थिति कितनी खतरनाक होगी.

दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता में सुधार के कारण कमीशन ऑफ एयर क्वालिटी इंप्रवूमेंट (CAQM) ने GRAP-3 पाबंदियां हटा दी हैं. AQI में सुधार के चलते अब कंस्ट्रक्शन और आवाजाही पर लगी पाबंदियों में राहत मिली है. IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले दिनों में AQI 'एवरेज' से 'खराब' श्रेणी में रह सकता है, जिसके कारण GRAP-3 के तहत गंभीर पाबंदियां लागू नहीं की जाएंगी.

AIMIM प्रवक्ता वारिस पठान ने स्पष्ट किया है कि मुसलमानों ने अब फैसला कर लिया है कि वे अब किसी भी ऐसे व्यक्ति को समर्थन नहीं देंगे जो केवल जातीय विभाजन करता है, बल्कि वे उस नेता के साथ जाएंगे जो विकास की बात करता है. उनका यह बयान समाज में सकारात्मक बदलाव और विकास को प्राथमिकता देने की दिशा में है. मुसलमान अब ऐसे नेताओं के साथ खड़े होंगे जो उनकी बेहतरी और समाज के समग्र विकास के लिए काम करें.









