
Krishna Janmashtami 2025 Puja Muhurat: जन्माष्टमी पर आपके शहर में क्या है श्रीकृष्ण पूजा का शुभ मुहूर्त? नोट करें टाइमिंग
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Krishna Janmashtami 2025 Puja Muhurat: इस बार अष्टमी तिथि पर रोहिणी नक्षत्र का संयोग नहीं बन रहा है. रोहिणी नक्षत्र 17 अगस्त को सुबह 04.38 बजे प्रारंभ होगा और इसका समापन 18 अगस्त को तड़के 03.17 बजे होगा. इसलिए उत्तम यही होगा कि आप आज रात बन रहे शुभ मुहूर्त में ही भगवान की पूजा-उपासना कर लें.
Krishna Janmashtami Puja Muhurat 2025: आज देशभर में जन्माष्टमी का उत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा है. भगवान कृष्ण का जन्म भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था. इस दिन भक्त उपवास रखते हैं. कान्हा जी का श्रृंगार करते हैं और भगवान को उनका प्रिय भोग लगाते हैं. इस बार जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण की पूजा का शुभ मुहूर्त रात 12 बजकर 04 मिनट से लेकर रात 12 बजकर 47 मिनट तक रहेगा. चंद्रोदय का समय रात 11 बजकर 32 मिनट निर्धारित है. आइए ऐसे में जानते हैं कि अलग-अलग शहरों के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण की पूजा का सबसे उत्तम मुहूर्त क्या रहने वाला है.
कृष्ण जन्माष्टमी पूजा मुहूर्त 2025 (Krishna Janmashtami 2025 Puja Muhurat City Wise)
कितने बजे लगेगा रोहिणी नक्षत्र?
इस बार अष्टमी तिथि पर रोहिणी नक्षत्र का संयोग नहीं बन रहा है. रोहिणी नक्षत्र 17 अगस्त को सुबह 04.38 बजे प्रारंभ होगा और इसका समापन 18 अगस्त को तड़के 03.17 बजे होगा. इसलिए उत्तम यही होगा कि आप आज रात बन रहे शुभ मुहूर्त में ही भगवान की पूजा-उपासना कर लें.
जन्माष्टमी? की पूजन विधि क्या है (Shri Krishna Janmashtami 2025 Pujan vidhi)
जन्माष्टमी के दिन सुबह स्नान करके व्रत या पूजा का संकल्प लें. यदि आपने व्रत का संकल्प लिया है तो आपको यह व्रत निर्जला करना होगा. कुछ खास परिस्थितियों में आप जलाहार या फलाहार भी यह व्रत रख सकते हैं. इस दिन पूर्णत: सात्विक रहें. मध्यरात्रि को भगवान कृष्ण की धातु की प्रतिमा को किसी पात्र में रखें. उस प्रतिमा को पहले दूध, फिर दही, शहद, शक्कर और अंत में घी से स्नान कराएं. इसे पंचामृत स्नान कहते हैं. इसके बाद कान्हा को जल से स्नान कराएं.

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