
IPL में धूम मचाने को तैयार ट्रक ड्राइवर का बेटा, गरीबी से लड़कर बना स्टार, पिता ने सुनाई दर्दभरी कहानी
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भारतीय क्रिकेट में अक्सर ऐसी कहानियां सामने आती हैं, जो दिल को छू जाती हैं. ये कहानियां यकीन दिलाती हैं कि मेहनत और जुनून के आगे हर मुश्किल छोटी पड़ जाती है. ऐसी ही कहानी मंगेश यादव की है, जो आईपीएल में भाग लेने जा रहे हैं.
भारतीय क्रिकेट की सबसे खूबसूरत बात यह है कि यहां मैदान तक पहुंचने के रास्ते महलों से नहीं, बल्कि संघर्ष की गलियों से होकर गुजरते हैं. बाएं हाथ के तेज गेंदबाज मंगेश यादव उसी मिट्टी से निकले खिलाड़ी हैं, जिन्होंने हालात को अपनी कमजोरी नहीं, बल्कि ताकत बना लिया.
इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 के लिए हुई खिलाड़ियों की मिनी नीलामी में जब रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) ने मंगेश यादव को 5.2 करोड़ रुपये में खरीदा, तो यह सिर्फ एक खिलाड़ी की बोली नहीं थी, बल्कि उस पिता की जीत थी जिसने ट्रक चलाते हुए अपने बेटे के सपनों को जिंदा रखा.
संघर्ष के दिनों को याद कर भावुक हुए पिता मंगेश यादव हाल ही में अपने पिता रामावध के साथ आरसीबी बोल्ड डायरीज (RCB Bold Diaries) में नजर आए, जहां उन्होंने अपने संघर्ष भरे दिनों को याद किया. उनके पिता ने बताया कि ट्रक ड्राइवर की जिंदगी कितनी मुश्किल होती है. मंगेश के पिता ने अपनी जिंदगी के उस कड़वे सच को साझा किया, जिसे सुनकर हर किसी का दिल भर आया.
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रामावध यादव ने कहा, 'ट्रक ड्राइवर की जिंदगी कोई जिंदगी नहीं होती. ना सही से खाना मिलता है, ना नहाने का समय. अगर ट्रक भरा हो तो उसे खाली करने की चिंता और अगर खाली हो तो दोबारा लोड करने की चिंता रहती है. उन्होंने आगे कहा कि बेटे के खर्च उठाने के लिए उन्हें कई बार रातों की नींद तक गंवानी पड़ी. रामावध कहते हैं, 'कई बार मैं रात में सो नहीं पाता था और सोचता रहता था कि पैसे कहां से लाऊं. रास्ते में गाड़ी चलाते हुए भी यही चिंता रहती थी.'
... जब मां बनीं मंगेश की कोच मंगेश यादव के इस सफर में उनके चाचा और कोच फूलचंद शर्मा भी अहम किरदार रहे. उन्होंने सबसे पहले मंगेश की प्रतिभा को पहचाना और उन्हें गांव से निकालकर दिल्ली तक पहुंचाया. वहीं से उनके क्रिकेट करियर ने असली रफ्तार पकड़ी. बचपन के दिनों को याद करते हुए मंगेश ने बताया कि वह अक्सर मोहल्ले में खेलने जाते, लेकिन झगड़ों की वजह से रोते हुए घर लौट आते थे. तब उनकी मां ही उनके सपनों की पहली कोच बनी. घर के छोटे से आंगन में गेंदबाजी करतीं और मंगेश घंटों बल्लेबाजी करते थे.

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