
INS विक्रांत के समंदर में उतरने से हिंद महासागर के पावर बैलेंस में क्या बदलेगा, चीन-PAK के लिए क्या हैं मायने?
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भारतीय नौसेना में आज INS विक्रांत शामिल हो गया. 43 हजार टन वजनी ये जहाज एयरक्राफ्ट कैरियर है, जो पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक से बना है. इसमें 2200 कंपार्टमेंट हैं और एक बार में 1600 से ज्यादा नौसैनिक रह सकते हैं. INS विक्रांत के आने से हिंद महासागर में भारत की ताकत और बढ़ गई है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज INS विक्रांत नौसेना को सौंप दिया. ये एयरक्राफ्ट कैरियर पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक से बना है. इसके साथ ही नौसेना के पास अब दो एयरक्राफ्ट कैरियर हो गए हैं. INS विक्रांत के अलावा INS विक्रमादित्य भी भारत के पास है. INS विक्रांत के आने से हिंद महासागर में भारत की ताकत बढ़ गई है.
नौसेना के वाइस चीफ वाइस एडमिरल एसएन घोरमाडे ने न्यूज एजेंसी को बताया कि INS विक्रांत के आने से हिंद-प्रशांत और हिंद महासागर में शांति और स्थिरता बढ़ेगी. उन्होंने बताया कि INS विक्रांत पर एयक्राफ्ट का लैंडिंग ट्रायल नवंबर में शुरू होगा और 2023 के मध्य तक ये पूरा हो जाएगा.
अमेरिका, यूके, रूस, चीन और फ्रांस के बाद भारत भी अब उन देशों की लिस्ट में शामिल हो गया है, जिनमें स्वदेशी तकनीक से एयरक्राफ्ट कैरियर को बनाने की क्षमता है. INS विक्रांत की 76% चीजें भारत में बनीं हैं.
भारत के पहले एयरक्राफ्ट कैरियर का नाम 'विक्रांत' ही था. ये वही जहाज था जिसने 1971 की जंग के दौरान भारत की ओर बढ़ रही पाकिस्तानी पनडुब्बी 'गाजी' को रोक दिया था. इस जहाज को भारत ने 1961 में ब्रिटेन की रॉयल नेवी से खरीदा था. 1997 में इसे डिकमीशंड कर दिया गया था. अब जब भारत ने स्वदेशी तकनीक से एयरक्राफ्ट कैरियर बनाया, तो वही नाम बरकरार रखा. वो INS विक्रांत भी हिंद महासागर में भारत की बड़ी ताकत था और नया INS विक्रांत भी बड़ी ताकत होगा.
कैसे बदलेगा पावर बैलेंस?
समंदर में ताकत बढ़ाने के लिए एयरक्राफ्ट कैरियर सबसे अहम हथियारों में से एक है. ये इसलिए भी अहम हो जाता है क्योंकि ये न सिर्फ समंदर में बेड़ों की सुरक्षा कर सकता है, बल्कि इससे हथियार दागे जा सकते हैं और लड़ाकू विमानों के साथ-साथ हेलिकॉप्टर भी तैनात किए जा सकते हैं.

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