
Hot Seat: सपा के गढ़ में अखिलेश के लिए कड़ा मुकाबला, क्या कन्नौज में रिपीट होगा 2019?
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अखिलेश यादव जैसे बड़े नेता के चुनावी मैदान में होने से कन्नौज सीट पर मुकाबला दिलचस्प हो गया है. 2019 में यहां से अखिलेश की पत्नी डिंपल यादव मैदान में थीं. मुकाबला इतना दिलचस्प रहा कि सपा का गढ़ माने जाने वाली सीट पर डिंपल को हार मिली और भाजपा के सुब्रत पाठक जीते थे.
UP के बारे में कहा जाता है कि यहां की सियासी नब्ज पकड़ने में बड़े से बड़े धाकड़ मात खा जाते हैं. ऐसे में एक्सिस माय इंडिया के एग्जिट पोल की मानें तो NDA को 64-67 सीटें मिलती दिख रही हैं. वहीं इंडिया गठबंधन को 8-12 सीटें मिल सकती हैं और अन्य को 0-1 सीट मिलने का अनुमान है. लेकिन इन सबके बीच भी एक सीट ऐसी है जिस ओर सबकी निगाहें टिकी हैं. वो सीट है कन्नौज. यहां से सपा प्रमुख और यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव खुद मैदान में हैं.
अखिलेश यादव जैसे बड़े नेता के चुनावी मैदान में होने से इस सीट पर मुकाबला दिलचस्प हो गया है. 2019 में यहां से अखिलेश की पत्नी डिंपल यादव मैदान में थीं. मुकाबला इतना दिलचस्प रहा कि सपा का गढ़ माने जाने वाली सीट पर डिंपल को हार मिली और भाजपा के सुब्रत पाठक जीते थे.
एक्सिस माय इंडिया के मुताबिक इस सीट पर कड़ा मुकाबला है. इस सीट की डेमोग्राफी की वजह से एक्सपर्ट इस सीट पर मुकाबला कड़ा मान रहे हैं.
2019 में दिलचस्प मुकाबला में जीती थी भाजपा
गौरतलब है कि कन्नौज सीट सपा का गढ़ माना जाती रही है. राम मनोहर लोहिया को कभी संसद में भेजने वाली कन्नौज सीट समाजवादियों का गढ़ रही है. क्योंकि, यहां से 1998 से 2014 तक हुए सभी चुनाव में सपा ने जीत हासिल की है. अखिलेश और डिंपल यादव भी यहां से चुनाव जीत चुके हैं. लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में सुब्रत पाठक ने डिंपल को शिकस्त दी थी. सपा-बसपा गठबंधन के साथ चुनाव लड़ने के बाद भी डिंपल यादव 12,353 वोटों से हार गई थीं. भाजपा ने एक बार फिर पाठक पर भरोसा जताया है.
क्या है कन्नौज का जातिगत समीकरण

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