
Hiring Freeze: नौकरी दिलाने वाले ही बेरोजगार? भर्ती इंडस्ट्री में सबसे बड़ी गिरावट
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वहीं Randstad India के चीफ कमर्शियल ऑफिसर शिव नाथ घोष का कहना है कि भर्ती में यह गिरावट टैलेंट की मांग कम होने का संकेत नहीं है, बल्कि भर्ती के तरीके बदल रहे हैं. उनके मुताबिक, 2025 में ‘एडमिनिस्ट्रेटिव रिक्रूटर’ की जगह धीरे-धीरे ‘स्ट्रैटेजिक टैलेंट एडवाइजर’ की भूमिका मजबूत हो रही है.
देश में ज्यादातर सेक्टरों में भर्ती की रफ्तार सुस्त पड़ गई है. आईटी सेक्टर पहले से ही लंबे समय से छंटनी के दौर से गुजर रहा है. ऊपर से AI की तेजी से बढ़ती भूमिका ने भविष्य को लेकर और अनिश्चितता बढ़ा दी है. ऐसे में सवाल है, क्या इस समय कोई भर्ती कर भी रहा है? दिलचस्प बात यह है कि नई नौकरियों में सबसे ज्यादा गिरावट खुद भर्ती (रिक्रूटमेंट) सेक्टर में ही देखने को मिल रही है.
2000 के दशक में छोटे-छोटे जॉब कंसल्टेंसी ऑफिस हर जगह दिखते थे. धीरे-धीरे ये ऑनलाइन पोर्टल में बदले. फिर 2020 के बाद, बाकी सेक्टरों की तरह, बड़े खिलाड़ियों ने बाजार पर कब्जा जमा लिया. अब हालत यह है कि भर्ती कराने वाली कंपनियों में ही भर्ती घट रही है.
Naukri.com की जॉब्सपीक सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में इस सेक्टर में सिर्फ 8,366 नई भर्तियां हुईं यानी औसतन 700 से भी कम प्रति माह. 2025 में यह आंकड़ा 6.6% गिरकर 7,810 रह गया, यानी करीब 651 भर्तियां प्रति माह. Adecco India के एसोसिएट डायरेक्टर और हेड ऑफ सेल्स पीयूष सप्रू का कहना है कि भर्ती में गिरावट की सबसे बड़ी वजह पूरे बाजार में सुस्ती है. कंपनियां अब खर्च कम करने और लागत नियंत्रण पर ध्यान दे रही हैं, इसलिए टैलेंट एक्विजिशन टीमों को भी छोटा किया जा रहा है.
उनके मुताबिक, एआई और ऑटोमेशन भी बड़ा कारण हैं. रिज्यूमे स्क्रीनिंग, स्किल बेस्ड शॉर्ट लिस्टिंग और बड़े पैमाने पर आवेदन छांटने का काम अब टूल्स के जरिए हो रहा है. इससे आईटी और डिजिटल जैसे सेक्टरों में पारंपरिक रिक्रूटर की जरूरत कम हुई है. हालांकि सप्रू कहते हैं कि असर हर जगह एक जैसा नहीं है. मैन्युफैक्चरिंग, हेल्थकेयर, रिटेल और BFSI सेक्टर में रिक्रूटर्स की मांग अपेक्षाकृत स्थिर है.
वहीं Randstad India के चीफ कमर्शियल ऑफिसर शिव नाथ घोष का कहना है कि भर्ती में यह गिरावट टैलेंट की मांग कम होने का संकेत नहीं है, बल्कि भर्ती के तरीके बदल रहे हैं. उनके मुताबिक, 2025 में ‘एडमिनिस्ट्रेटिव रिक्रूटर’ की जगह धीरे-धीरे ‘स्ट्रैटेजिक टैलेंट एडवाइजर’ की भूमिका मजबूत हो रही है.
घोष का कहना है कि एआई ने दोहराए जाने वाले काम आसान कर दिए हैं, लेकिन इंसानी रिक्रूटर की जरूरत खत्म नहीं हुई है. बल्कि अब उनसे ज्यादा स्किल, समझ और मानवीय जुड़ाव की उम्मीद की जा रही है. कई कंपनियां अपनी इन-हाउस भर्ती टीमों को भी ऑप्टिमाइज़ कर रही हैं. वे ऐसे प्रोफेशनल्स को प्राथमिकता दे रही हैं जो एआई डेटा को समझ सकें, स्किल बेस्ड हायरिंग कर सकें और उम्मीदवारों से मजबूत रिश्ता बना सकें.

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