
HEAT OF THE MOMENT: आफताब के कोर्ट में बयान के क्या-क्या हैं कानूनी पहलू, एक्सपर्ट से समझिए
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दिल्ली में श्रद्धा वॉल्कर मर्डर केस में आरोपी आफताब ने दिल्ली की साकेत कोर्ट में कहा कि जो कुछ हुआ, वो सिर्फ HEAT OF THE MOMENT था. हमने इसे समझने के लिए सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता डॉ. कपिल सांखला से बातचीत की. सांखला ने इस बयान का विश्लेषण किया है. उन्होंने कहा कि जांचकर्ताओं को वैज्ञानिक साक्ष्यों (scientific evidences) पर कड़ी मेहनत करनी होगी.
दिल्ली में श्रद्धा वॉल्कर मर्डर केस में आरोपी आफताब की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं. मंगलवार को उसका पॉलिग्राफ टेस्ट किया गया. बुधवार को दिल्ली पुलिस फिर उसे फोरेंसिक लैब लेकर जाएगी. बताया जा रहा है कि आरोपी आफताब ने साकेत कोर्ट में पेशी के दौरान जज के सामने कहा कि जो कुछ भी हुआ, वो HEAT OF THE MOMENT था. यानी जो उसने किया, वो बिना सोचे समझे गुस्से में किया. आइए जानते हैं इसके मायने...
HEAT OF THE MOMENT और Law of Court को समझने के लिए हमने सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता डॉ. कपिल सांखला से बातचीत की. सांखला ने इस बयान का विश्लेषण किया है. उन्होंने बताया कि अभियुक्त के बयान का कानून की नजर में तब तक कोई मतलब नहीं है जब तक कि वह इकबालिया बयान (स्वीकारात्मक) ना हो और वह भी तब, जब वह न्यायिक इकबालिया बयान हो. यानि मजिस्ट्रेट के समक्ष कलमबंद बयान ही मायने रखता है.
उन्होंने आगे कहा- यदि बयान के जरिए कोई बात स्वीकार या प्रगट की जाती है तो उस बयान के सिर्फ आंशिक हिस्से का ही उपयोग किया जा सकता है. सांखला का कहना था कि कोर्ट के अनुसार वह जो भी बयान दे रहा है, वह महत्वपूर्ण नहीं है. महत्वपूर्ण यह है कि वह जांच को गुमराह करने की कोशिश तो नहीं कर रहा है. वह जांच प्रक्रिया को गलत दिशा देने या देरी करने की कोशिश तो नहीं कर रहा है.
उन्होंने बताया कि पहली बार जब उसने यह कहते हुए बयान दिया कि मैं इन्फ्लुएंस में हूं तो सिर्फ इन्फ्लुएंस में रहने वाला व्यक्ति उसकी मदद करने वाला नहीं है. जब तक कि वह यह नहीं दिखाता कि वह नहीं जानता कि कोई उसे नशीली दवा दे रहा है या यदि वह आदी था और नहीं जान रहा था कि क्या हो रहा है.
एक्सपर्ट ने ये पॉइंट भी जरूरी बताए... - Heat of The Moment कहने से अभियुक्त के बयान के आधार पर केस को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता है. क्योंकि वह खुद हथियार लेकर घर आया था, उसने हत्या के मामले से पहले मैपिंग की थी. इससे केस कमजोर नहीं होगा, बल्कि जांच पटरी से उतर जाएगी. - जांचकर्ताओं को वैज्ञानिक साक्ष्यों (scientific evidences) पर कड़ी मेहनत करनी होगी. इससे पुलिस को कोर्ट में काफी मदद मिलेगी. - इस समय केस मजबूत स्थिति में नहीं है, लेकिन दूसरी ओर मामले की जांच अभी शुरू ही हुई है. - इस केस में वैज्ञानिक प्रमाण मुख्य भूमिका निभाएंगे. - पुलिस को ढिलाई नहीं करनी होगी. इस समय सबूत जुटाने के लिए सबसे ज्यादा मेहनत करनी पड़ेगी.
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