
Garud Puran: मृत्यु के बाद शव को अकेला क्यों नहीं छोड़ते? गरुड़ पुराण में बताई गई इसकी वजह
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Garud Puran: गरुड़ पुराण में मृत्यु के बाद आत्मा और शव से जुड़ी कई महत्वपूर्ण मान्यताएं बताई गई हैं. जानें शव को अकेला क्यों नहीं छोड़ा जाता है और किन कारणों से दाह संस्कार में देरी की जाती है.
Garud Puran: गरुड़ पुराण के अनुसार इस संसार में जो भी जन्म लेता है, उसका अंत निश्चित है. मनुष्य, देवता, पशु या पक्षी, चाहे कोई भी मृत्यु से बच नहीं सकता है. यहां तक कि ग्रह, नक्षत्र और सूर्य तक की भी एक तय आयु होती है. इसे ही जन्म और मृत्यु का चक्र कहा गया है. इस चक्र में व्यक्ति अपने कर्मों और मानसिक स्थिति के अनुसार अलग-अलग योनियों में जन्म लेता है. यह क्रम तब तक चलता रहता है, जब तक आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति नहीं हो जाती है.
गरुड़ पुराण में मृत्यु के बाद की प्रक्रियाओं को लेकर कई नियम बताए गए हैं. इन्हीं में से एक सवाल यह भी है कि मृत्यु के बाद शव को अकेला क्यों नहीं छोड़ा जाता है और किन हालात में अंतिम संस्कार तुरंत नहीं किया जाता है. आइए इसे आसान शब्दों में समझते हैं.
शव को अकेला न छोड़ने के पीछे 3 मुख्य कारण
1. सुरक्षा कारण
गरुड़ पुराण के अनुसार, यदि शव को बिना निगरानी के छोड़ दिया जाए, तो उस पर कीड़े-मकोड़े, चींटियां या अन्य जीव नुकसान पहुंचा सकते हैं. इसी वजह से कोई व्यक्ति पास में बैठकर उसकी देखभाल करता है.
2. नकारात्मक शक्तियों से बचाव

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