
'FIR कराने के लिए रात में 15 किलोमीटर दूर नहीं जा सकती रेप पीड़िता', बॉम्बे हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी
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अमरावती सेशन कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने महिला से रेप के आरोपी मजदूर को दोषी ठहराते हुए 10 साल की सजा भी बरकरार रखी है. पीठ ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि पीड़िता की गवाही विश्वसनीयता के मानकों पर खरी उतरती है. पीठ ने कहा, 'अभियोक्ता का सबूत ठोस और विश्वसनीय हैं.'
बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने 35 वर्षीय एक महिला के साथ रेप करने के मामले में अमरावती सेशन कोर्ट के फैसले को सही मानते हुए आरोपी मजदूर को दोषी ठहराते हुए 10 साल की सजा भी बरकरार रखी है.
अमरावती के 35 वर्षीय मजदूर आरोपी बाल्या उर्फ राहुल लोखंडे ने अपील दायर की थी, लेकिन अदालत ने कहा कि पीड़िता की गवाही ठोस और भरोसेमंद है.
'ठोस और विश्वसनीय हैं सबूत'
न्यायमूर्ति जीए सनप ने फैसला सुनाते हुए कहा कि पीड़िता की गवाही विश्वसनीयता के मानकों पर खरी उतरती है. पीठ ने कहा, 'अभियोक्ता का सबूत ठोस और विश्वसनीय हैं. अभियोक्ता का साक्ष्य आत्मविश्वास को प्रेरित करता है.'
अभियुक्त का बचाव झूठा निहितार्थ था, क्योंकि यह आरोप लगाया गया था कि अभियुक्त उस मकान मालिक का कर्मचारी था. जिसके घर में पीड़िता रहती थी और पीड़िता का अपने किराए के घर के संबंध में मकान मालिक के साथ विवाद था. हालांकि, अदालत ने इस दावे को खारिज कर दिया और कहा, 'अभियोक्ता एक असहाय महिला, अपीलार्थी के खिलाफ एक झूठी रिपोर्ट दर्ज करने की हिम्मत नहीं करती.'
लोखंडे ने एफआईआर दर्ज करने में देरी की दलील दी. हालांकि, पीठ ने कहा, 'बलात्कार के मामले में कोई भी स्वाभिमानी महिला अपने सम्मान के खिलाफ अपमानजनक बयान देने के लिए अदालत में आगे नहीं आएगी, जैसे कि उसके साथ बलात्कार के अपराध में शामिल है. महिलाओं की अंतर्निहित शर्मिंदगी और यौन आक्रामकता के आक्रोश को छिपाने की प्रवृत्ति ऐसे कारक हैं, जिन्हें अदालत नजरअंदाज नहीं कर सकती.'

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