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Explainer: 10 मिनट डिलीवरी का खेल; फायदा या सिर्फ फंडिंग की आग? क्या टिकाऊ है इसका बिजनेस मॉडल?
Zee News
हाल ही में हुई पूरे भारत में गिग वर्कर की हड़ताल ने इस बात पर जोर दिया कि क्या 10-मिनट क्विक कॉमर्स मॉडल जरूरी है. इस खेल में राइडर्स ऑर्डर जल्दी डिलीवर करने के लिए अपनी जान जोखिम में डालते हैं.
10-Minute Delivery Model : कोविड महामारी के बाद 'दस मिनट डिलीवरी' की सर्विस 'दिन दोगुनी रात चौगुनी' बढ़ी है. इस सर्विस ने भारत के क्विक कॉमर्स सेक्टर को बदलकर रख दिया है. देश में ‘दस मिनट डिलीवरी’ की सर्विस ने जिस रफ्तार से विस्तार किया है. उसने रिटेल और ई-कॉमर्स सेक्टर की तस्वीर बदल दी है. लॉकडाउन के दौरान घर तक सामान पहुंचाने की जरूरत ने क्विक कॉमर्स मॉडल को जन्म दिया और आज ये सेक्टर शहरी कंज्यूमर्स की लाइफस्टाइल का हिस्सा बन चुका है. ग्रॉसरी से लेकर दवाइयों और डेली जरूरत के सामान तक सब कुछ मिनटों में दरवाजे पर पहुंचाने का वादा इस मॉडल की सबसे बड़ी ताकत है.
भारत के रिटेल सेक्टर के माहौल में एक बड़ा बदलाव आया है. दस मिनट में किराने का सामान डिलीवर करने की सर्विस को एक एक्सपेरिमेंटल रेस के तौर पर शुरू हुआ था. वो अब कई अरब डॉलर के इंफ्रास्ट्रक्चर में बदल गया है. ये अब हाई-एंड इलेक्ट्रॉनिक्स से लेकर व्हाइट गुड्स तक सब कुछ मिनटों में पहुंचा देता है. घरों की बढ़ती इनकम और सर्विस के लिए बढ़ती पसंद ने क्विक कॉमर्स को शहरी कंज्यूमर्स के बढ़ते हिस्से के लिए पसंदीदा शॉपिंग चैनल बना दिया है.
क्विक कॉमर्स सेक्टर में बढ़ा कॉम्पिटिशन
Blinkit, Zepto और Swiggy Instamart जैसे कई बड़े प्लेयर्स क्विक कॉमर्स सेक्टर में कॉम्पिटिशन को और भी तेज कर रहे हैं. अमेजॉन और फ्लिपकार्ट, Blinkit, जेप्टो और स्विगी इंस्टमार्ट को चुनौती देने के लिए डिस्काउंट बढ़ा रहे हैं. इससे एक नया प्राइस वॉर शुरू हो गया है. जनवरी में डिस्काउंट बढ़कर 55% हो गया था.
‘डार्क स्टोर’ मॉडल




