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किताबें बेचीं, 40 छात्रों से शुरुआत, आज 3000 करोड़ के मालिक, कौन हैं गलगोटिया यूनिवर्सिटी के मालिक?
Zee News
सुनील गलगोटिया ने अपने करियर की शुरुआत बेहद छोटे लेवल से की थी. पहली किताब प्रकाशित करने के लिए उन्हें लगभग 9,000 रुपये उधार लेने पड़े थे. जीवन में शुरुआती चुनौतियों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी. इसके बाद उन्होंने शिक्षा क्षेत्र में कदम रखने का फैसला किया.
Galgotias University : बदनाम होंगे तो क्या, नाम न होगा...... इस कहावत को इंडिया AI समिट का एक वीडियो पूरी तरह चरितार्थ कर रहा है. सोशल मीडिया पर गलगोटिया यूनिवर्सिटी की चर्चा हर तरफ जोरों पर है. इंडिया AI समिट का एक वीडियो वायरल हो रहा है. जिसकी वजह से गलगोटिया यूनिवर्सिटी का नाम सबकी जुबान है. भारत मंडपम के इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 में गलगोटिया यूनिवर्सिटी को बुधवार को बड़ी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा. जब उसे अपना एग्जिबिशन स्टॉल खाली करने के लिए कहा गया.
विवाद किस बात से शुरू हुआ?
ये मामला तब उठा जब यूनिवर्सिटी के बूथ पर दिखाए गए एक रोबोटिक कुत्ते को, जिसके बारे में दावा किया गया था कि वो 'ओरियन' नाम का एक इन-हाउस इनोवेशन है. इसे देखने वालों ने कमर्शियली उपलब्ध चीनी प्रोडक्ट के तौर पर पहचाना. रोबोट असल में यूनिट्री Go2 था. इसे चीनी रोबोटिक्स फर्म यूनिट्री ने डेवलप किया था और भारत में लगभग 2-3 लाख रुपये में बेचा गया था.
ये घटना AI इवेंट में एक बड़े विवाद में बदल गई और इसने घरेलू इनोवेशन के तौर पर दिखाई गई टेक्नोलॉजी की असलियत पर सवाल उठाए हैं. गलगोटिया यूनिवर्सिटी को अपना AI समिट स्टॉल खाली करने के लिए कहा गया है. आपको ये जानने में दिलचस्पी होगी की आखिर गलगोटिया यूनिवर्सिटी का साम्राज्य कैसे बना और इसका मालिक कौन है?
इम्पोर्टेड टेक्नोलॉजी पर बहस




