
Dhurandhar 2: दिल पे ज़ख्म खाते हैं...जब कहानी खत्म होती है, तो सिर्फ रीमेक ही बचता है?
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नुसरत फतेह अली खान की एक कव्वाली इन दिनों सोशल मीडिया पर घूम रही है, थियेटर्स में गूंज रही है. धुरंधर-2 में आए गाने 'दिल पर जख़्म खाते हैं' की चर्चा हर जगह है. फिल्म में आए रिमेक के बीच कहीं लोग असली कव्वाली और इसे लिखने वाले को ना भूल जाएं, ऐसे में हम आपके लिए इस कव्वाली से जुड़ा किस्सा लेकर आए हैं.
गैंग्स ऑफ वासेपुर में रामाधीर सिंह का किरदार निभाने वाले तिग्मांशु धुलिया को आप जानते ही होंगे. जी वही, 'तुमसे ना हो पाएगा बेटा' वाले तिग्मांशु. फ़िल्मों पर बात करते हुए एक इंटरव्यू में तिग्मांशु ने कहा था कि बॉलीवुड में अब कहानी नहीं है, कोई हीरो नहीं है क्यूंकि नई पीढ़ी वाले डायरेक्टर, सिंगर या फ़िल्मी दुनिया से जुड़े लोगों ने दुनिया नहीं देखी है, इसलिए सबसे आसान रास्ता रीमेक बनाना या फिर पुरानी कहानी/गाने/फिल्म को अपना ट्विस्ट देकर उसे अपने तरीके से बनना, बेचना ही बचता है.
वैसे ये कोई नई बात भी नहीं है, काफी समय से हो रहा है और आगे भी होता ही रहेगा. ऐसा ही एक बार फिर हुआ है, धुरंधर: द रिवेंज (धुरंधर-2) में, कव्वाली के उस्ताद नुसरत फतेह अली खान की गाई हुई एक कव्वाली लौट कर आई है, 'दिल पर ज़ख्म खाते हैं, जान पे गुज़रते हैं'. सोशल मीडिया पर इन्फ्लूएंसर इस नए गाने की रील बना रहे हैं, मामला वायरल हो रहा है, तो हमने भी सोचा कि थोड़ी जांच-पड़ताल की जाए.
रीमेक बनाने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन 90's किड्स और उससे पहले वाली पीढ़ी को दिक्कत यहां होती है कि वो असली वर्जन से इतना जुड़े होते हैं कि किसी भी तरह की छेड़छाड़ से परेशानी होती ही है. और यहां तो मामला नुसरत फतेह अली खान की कव्वाली से जुड़ा हुआ है, इस लिहाज़ से थोड़ा निजी भी हो जाता है. धुरंधर-2 में इस गाने को रिमिक्स टच के साथ गाने वाले सिंगर का नाम भी खान साहब है, दरअसल वो भी नुसरत फतेह अली खान के फैन बताते हैं और इसलिए अपना नाम भी खान साहब रख लिया और उनकी ही गाई हुई कव्वालियों को अक्सर गाते हुए सुनाई पड़ते हैं.
फिल्म के डायरेक्टर आदित्य धर की तारीफ़ हो रही है कि उन्होंने पुराने गानों का बेहतरीन इस्तेमाल किया है. कई लोग इसकी तारीफ़ भी कर रहे हैं, लेकिन इसका एक पक्ष ये भी है कि पुराने गानों में बीट और रैप डालकर उसे एडिक्टिव बनाया गया है, गानों का ट्रीटमेंट कैसा भी हो लेकिन गानों को ख़राब ही किया गया है, हां तारीफ इस बात की होनी चाहिए कि गानों का इस्तेमाल कहां, किस सीन में किया जाए आदित्य धर ने वहां कमाल कर दिया है.
लेकिन इस गाने की असली कहानी क्या है, क्या सच में यह गाना सिर्फ धुरंधर की वजह से पॉपुलर हुआ है? ऐसा बिल्कुल नहीं है. असल में इस कलाम की जड़ें उस दौर में हैं जब शायरी सिर्फ शब्द नहीं, रूह की आवाज़ हुआ करती थी.

स्पाई-एक्शन फिल्म 'धुरंधर: द रिवेंज' बॉक्स ऑफिस पर सफल हो रही है, जिसमें बिमल ओबेरॉय ने शिरानी अहमद बलोच का किरदार निभाकर अपनी छाप छोड़ी है. ये किरदार पाकिस्तान की राजनीति और कट्टरपंथी सोच से जुड़ा है. फिल्म में शिरानी बलोच का रोल आतंकवादी नेटवर्क और कट्टर संगठनों की मानसिकता को दर्शाता है, जो कहानी में सस्पेंस और तनाव बढ़ाता है.












