
Delhi Pollution: दिल्ली में लगातार बढ़ रहा प्रदूषण, 300 के करीब AQI, कई इलाकों में स्थिति 'गंभीर'
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Delhi Pollution: दिल्ली-एनसीआर में कुछ इलाकों का AQI 300 से ऊपर पहुंच गया है. ताजा आंकड़ों की बात करें तो आज, 18 अक्टूबर को दिल्ली का औसत AQI 293 मापा गया, जो खराब श्रेणी में आता है.
सर्दियों के दस्तक देते ही देश की राजधानी पर जहरीली हवा का साया मंडराने लगा है. पिछले कुछ दिनों में दिल्ली में AQI का लेवल तेजी से बढ़ा है. दिल्ली-एनसीआर में कुछ इलाकों का AQI 300 से ऊपर पहुंच गया है. वायु प्रदूषण बढ़ने पर दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले लोगों को अपनी सेहत की फिक्र सताने लगती है. ताजा आंकड़ों की बात करें तो आज, 18 अक्टूबर को दिल्ली का औसत AQI 293 मापा गया, जो खराब श्रेणी में आता है.
आनंद विहार, अलीपुर, बवाना, बुराड़ी क्रॉसिंग जैसे दिल्ली के कई इलाकों का AQI बहुत खराब श्रेणी में पहुंच गया है. प्रदूषण की स्थिति पर दिल्ली सरकार सचिवालय में आपात बैठक करेगी. दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय एमसीडी, पीडब्ल्यूडी, डीपीसीसी, पर्यावरण, परिवहन, यातायात पुलिस और अन्य संबंधित विभागों के साथ मुख्य बैठक की अध्यक्षता करेंगे. ग्रीन वॉर रूम के जरिए 13 हॉटस्पॉट की निगरानी पर भी रणनीति बनने की उम्मीद है.
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कैसे मापी जाती है एयर क्वालिटी?

आज जब वक्त इतना कीमती हो गया है कि लोग हरेक चीज की दस मिनट में डिलीवरी चाहते हैं. वहीं दूसरी तरफ विडंबना ये है कि भारत का एक शहर ऐसा है जहां इंसान को कहीं जाने के लिए सड़कों पर ट्रैफिक में फंसना पड़ता है. यहां हर साल औसतन 168 घंटे लोग ट्रैफिक में फंसे रहते हैं. यानी पूरे एक हफ्ते का समय सिर्फ ट्रैफिक में चला जाता है.

जिस शहर की फायरब्रिगेड के पास छोटे से तालाब के पानी से एक शख्स को निकालने के लिए टूल नहीं है, वह किसी बड़े हादसे से कैसे निबटेगा. युवराज मेहता की मौत ने नोएडा की आपदा राहत तैयारियां की कलई खोल दी है. सवाल यह है कि जब नोएडा जैसे यूपी के सबसे समृद्ध शहर में ये हालात हैं तो बाकी शहर-कस्बों की स्थिति कितनी खतरनाक होगी.

दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता में सुधार के कारण कमीशन ऑफ एयर क्वालिटी इंप्रवूमेंट (CAQM) ने GRAP-3 पाबंदियां हटा दी हैं. AQI में सुधार के चलते अब कंस्ट्रक्शन और आवाजाही पर लगी पाबंदियों में राहत मिली है. IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले दिनों में AQI 'एवरेज' से 'खराब' श्रेणी में रह सकता है, जिसके कारण GRAP-3 के तहत गंभीर पाबंदियां लागू नहीं की जाएंगी.

AIMIM प्रवक्ता वारिस पठान ने स्पष्ट किया है कि मुसलमानों ने अब फैसला कर लिया है कि वे अब किसी भी ऐसे व्यक्ति को समर्थन नहीं देंगे जो केवल जातीय विभाजन करता है, बल्कि वे उस नेता के साथ जाएंगे जो विकास की बात करता है. उनका यह बयान समाज में सकारात्मक बदलाव और विकास को प्राथमिकता देने की दिशा में है. मुसलमान अब ऐसे नेताओं के साथ खड़े होंगे जो उनकी बेहतरी और समाज के समग्र विकास के लिए काम करें.









