
Defence Stocks: पाकिस्तान से तनातनी... और ये शेयर बने रॉकेट, एक हफ्ते में ही निवेशक मालामाल!
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पाकिस्तान से तनातनी के बीच डिफेंस स्टॉक्स में शानदार तेजी देखी जा रही है. कारोबारी हफ्ते के आखिरी दिन शुक्रवार को Cochin Shipyard के शेयर 12 फीसदी से ज्यादा उछलकर 2032 रुपये पर कारोबार कर रहा है.
शेयर बाजार (Share Market) में कब क्या हो जाए, कहा नहीं जा सकता है. निवेशक के एक दांव से भारी नुकसान हो सकता है और तगड़ा मुनाफा भी. पिछले केवल एक हफ्ते में कुछ ऐसे शेयर्स हैं, जिसने दमदार रिटर्न देकर निवेशकों को चौंकाया है. हालांकि अब तक मई का महीना निवेशकों के लिए अच्छा रहा है.
मई महीने के दौरान बाजार में अच्छी-खासी तेजी देखने को मिल रही है. लॉर्जकैप के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में रौनक लौटती नजर आ रही है. जिससे निवेशकों को राहत मिलती दिख रही है, क्योंकि पिछले करीब 6 महीने में शेयर बाजार ने निवेशकों को तगड़ा झटका दिया है. तमाम स्मॉलकैप और मिडकैप शेयरों के भाव गिरकर आधे से कम हो गए. लेकिन अब थोड़ी-थोड़ी रिकवरी देखने को मिल रही है.
इन शेयरों में तूफानी तेजी
लेकिन इस बीच कुछ शेयरों में जोरदार तेजी देखी जा रही है. इस कड़ी में सरकारी कंपनी Cochin Shipyard Ltd ने सबको हैरान किया है. इस शेयर ने पिछले हफ्ते में उम्मीद से ज्यादा रिटर्न दिया है. इस शेयर की कीमत 8 मई को 1400 रुपये थी, जो अब बढ़कर 2000 के पार पहुंच चुकी है. यानी महज एक हफ्ते में 40 फीसदी से ज्यादा रिटर्न दिया है.
महज 6 महीने में कोचिन शिपयार्ड लिमिटेड के शेयर ने 56 फीसदी का रिटर्न दिया है. जबकि एक साल में 51 फीसदी का रिटर्न बना है. हालांकि फरवरी 2025 में ये शेयर गिरकर 1180 रुपये पर पहुंच गया था. इस शेयर का ऑलटाइम हाई 2979 रुपये है, जो इसने पिछले साल जुलाई में लगाया था.
दरअसल, पाकिस्तान से तनातनी के बीच डिफेंस स्टॉक्स में शानदार तेजी देखी जा रही है. कारोबारी हफ्ते के आखिरी दिन शुक्रवार को Cochin Shipyard के शेयर 12 फीसदी से ज्यादा उछलकर 2032 रुपये पर कारोबार कर रहा है.

यूपी में सरकारी नौकरी का सपना देखना है तो खुद में बहुत सहनशीलता पैदा करनी होगी क्योंकि सिस्टम पर विश्वास तो बन नहीं पा रहा. एग्जाम देकर लंबा इंतजार करना फिर अगर परीक्षा कैंसिल होती है तो दिल में पत्थर रखकर री-एग्जाम, रिजल्ट और जॉइनिंग तक इंतजार करना. सरकार लगातार कह रही है लेकिन परीक्षाएं आयोजित कराने वाली संस्थाएं अब तक एक ऐसा पारदर्शी और स्वच्छ सिस्टम तैयार नहीं कर पाईं.












