
Deepfake का जाल हर तरफ! AI के इस दौर में 1 मिनट में ऐसे पहचानें फेक वीडियो और तस्वीरें
ABP News
Fake Videos and Photo: आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने हमारी जिंदगी को आसान बनाया है लेकिन इसके साथ खतरे भी बढ़े हैं.
Fake Videos and Photo: आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने हमारी जिंदगी को आसान बनाया है लेकिन इसके साथ खतरे भी बढ़े हैं. Deepfake तकनीक की मदद से किसी भी व्यक्ति की आवाज, चेहरा या हाव-भाव को बेहद असली जैसा बनाकर फर्जी वीडियो और तस्वीरें तैयार की जा सकती हैं. सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले कई वीडियो अब सच और झूठ की सीमा को धुंधला कर रहे हैं. ऐसे में जरूरी है कि हम सतर्क रहें और कुछ आसान तरीकों से फेक कंटेंट की पहचान करना सीखें.
Deepfake एक ऐसी AI तकनीक है जिसमें मशीन लर्निंग मॉडल किसी असली व्यक्ति के चेहरे या आवाज को कॉपी करके नकली वीडियो या ऑडियो बना देता है. इसका इस्तेमाल मनोरंजन से लेकर राजनीतिक प्रचार और साइबर फ्रॉड तक में हो सकता है. कई बार लोग बिना जांचे-परखे ऐसे वीडियो पर भरोसा कर लेते हैं जिससे गलतफहमियां और अफवाहें फैलती हैं.
फर्जी वीडियो में अक्सर चेहरे की मूवमेंट थोड़ी असामान्य दिखती है. आंखों की झपक कम या ज्यादा हो सकती है, होंठों की हरकत आवाज़ से मेल नहीं खाती या चेहरे के किनारों पर हल्की धुंधलाहट नजर आती है. यदि वीडियो को ध्यान से देखें तो स्किन टोन और लाइटिंग में भी गड़बड़ी पकड़ में आ सकती है.
कई Deepfake वीडियो में आवाज़ और होंठों की गति में हल्का अंतर होता है. कभी-कभी आवाज़ बहुत सपाट या रोबोटिक लग सकती है. अगर बैकग्राउंड साउंड और मुख्य आवाज़ का तालमेल अजीब लगे तो शक करना चाहिए.













