
CUET, FYUP, PhD... यूजीसी अध्यक्ष जगदीश कुमार रिटायर, कार्यकाल में हुए ये 10 बड़े बदलाव
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प्रो. एम. जगदीश कुमार के ढाई साल से अधिक के कार्यकाल में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में कई बड़े बदलाव हुए, जो नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) 2020 को लागू करने और भारतीय शिक्षा को इंटरनेशल लेवल पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में केंद्रित थे. उनकी नीतियों का असर आने वाले सालों में दिखेगा.
यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर एम. जगदीश कुमार ने अपने ढाई साल के कार्यकाल में शिक्षा को लचीला, समावेशी और तकनीक आधारित बनाने की कोशिश की. उनके नेतृत्व में ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो (GER) को 2035 तक 50% तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया. उनके रिटायरमेंट की घोषणा 7 अप्रैल 2025 को UGC ने की, और वह 8 अप्रैल 2025 तक यूजीसी अध्यक्ष पद पर रहे.
प्रो. एम. जगदीश कुमार के ढाई साल से अधिक के कार्यकाल में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में कई बड़े बदलाव हुए, जो नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) 2020 को लागू करने और भारतीय शिक्षा को इंटरनेशल लेवल पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में केंद्रित थे. उनकी नीतियों का असर आने वाले सालों में दिखेगा. आइए जानते हैं उनके कार्यकाल में शिक्षा जगत में क्या-क्या बड़े बदलाव हुए.
1. कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET) की शुरुआत
विश्वविद्यालयों में यूजी और पीजी दाखिले के लिए कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET) की शुरुआत की गई. पहले चरण में 45 केंद्रीय विश्वविद्यालय शामिल हुए, और 2025 तक 90 से ज्यादा विश्वविद्यालय इससे जुड़ गए. यह परीक्षा NTA (नेशनल टेस्टिंग एजेंसी) द्वारा आयोजित की जाती है, जिसमें छात्र अपनी पसंद के 6 सब्जेक्ट्स चुन सकते हैं. 12वीं के अंकों की जगह इस टेस्ट के स्कोर को प्राथमिकता दी गई. हालांकि, CUET और नए नियमों को लेकर कुछ विवाद भी हुए, जैसे तकनीकी पहुंच और राज्यों का विरोध. शुरुआती साल में तकनीकी खामियों (सर्वर डाउन, पेपर लीक) की शिकायतें भी आईं. 2025 तक प्रक्रिया को ऑनलाइन और पारदर्शी बनाया गया. 27 मार्च 2022 को सीयूईटी घोषणा की गई थी और पहली बार 15 जुलाई 2022 से एग्जाम शुरू हुए.
2. एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स (ABC) और मल्टीपल एंट्री-एग्जिट सिस्टम
एम. जगदीश कुमार के कार्यकाल में ही एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स (ABC) और मल्टीपल एंट्री-एग्जिट सिस्टम की रूपरेखा तैयारी हुई. एबीसी, एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जहां छात्रों के क्रेडिट्स जमा होंगे. इससे चार साल के यूजी प्रोग्राम में लचीलापन लाने के लिए प्रस्तावित किया गया. पहले साल बाद सर्टिफिकेट, दो साल बाद डिप्लोमा, तीन साल बाद डिग्री, और चार साल बाद ऑनर्स डिग्री के जरिए छात्रों को मल्टीपल एंट्री-एग्जिट का मौका मिलेगा. 2025 तक 63 लाख छात्र और 1,200 संस्थान इससे जुड़ चुके हैं. इससे पढ़ाई छोड़ने की दर में कमी की उम्मीद है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल पहुंच की कमी एक चुनौती बन सकती है.

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