
CrPC Section 149: पुलिस का संज्ञेय अपराध को रोकना बताती है धारा 149
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सीआरपीसी (CrPC) की धारा 149 (Section 149) में पुलिस (Police) का संज्ञेय अपराध को रोकना परिभाषित किया गया है. आइए जानते हैं कि सीआरपीसी की धारा 149 इस बारे में क्या कहती है?
Code of Criminal Procedure: दंड प्रक्रिया संहिता में कोर्ट (Court) और पुलिस की शक्तियों (Power of Police) के बारे में प्रावधान किए गए हैं. ठीक इसी तरह से सीआरपीसी की धारा 149 (Section 149) में पुलिस (Police) का संज्ञेय अपराध को रोकना परिभाषित किया गया है. आइए जानते हैं कि सीआरपीसी की धारा 149 इस बारे में क्या कहती है?
सीआरपीसी की धारा 149 (CrPC Section 149) दंड प्रक्रिया संहिता (Code of Criminal Procedure 1973) की धारा 149 में पुलिस का संज्ञेय अपराधों का निवारण (Prevention of cognizable offenses) करना परिभाषित (Define) किया गया है. CrPC की धारा 149 के मुताबिक, प्रत्येक पुलिस अधिकारी (Police Officer) किसी संज्ञेय अपराध (Serious crime) के किए जाने का निवारण करने के प्रयोजन (Purpose of redress) से हस्तक्षेप कर सकेगा और अपनी पूरी सामर्थ्य (Full potential) से उसे निवारित (Prevent) करेगा.
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क्या है दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 (Code of Criminal Procedure, 1973) भारत में आपराधिक कानून के क्रियान्यवन के लिये मुख्य कानून है. यह सन् 1973 में पारित हुआ था. इसे देश में 1 अप्रैल 1974 को लागू किया गया. दंड प्रक्रिया संहिता का संक्षिप्त नाम 'सीआरपीसी' है. सीआरपीसी (CRPC) अंग्रेजी का शब्द है. जिसकी फुल फॉर्म Code of Criminal Procedure (कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसिजर) होती है. इसे हिंदी में 'दंड प्रक्रिया संहिता' कहा जाता है. CrPC में 37 अध्याय (Chapter) हैं, जिनके अधीन कुल 484 धाराएं (Sections) मौजूद हैं. जब कोई अपराध होता है, तो हमेशा दो प्रक्रियाएं होती हैं, एक तो पुलिस अपराध (Crime) की जांच करने में अपनाती है, जो पीड़ित (Victim) से संबंधित होती है और दूसरी प्रक्रिया आरोपी (Accused) के संबंध में होती है. सीआरपीसी (CrPC) में इन प्रक्रियाओं का ब्योरा दिया गया है. CrPC में अब तक कई बार संशोधन (Amendment) भी किए जा चुके हैं.
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