
Crime Katha: अनंत सिंह, सूरजभान, सोनू-मोनू और टाल का गुट... मोकामा में गैंगवॉर और अदावत की खूनी कहानी
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मोकामा का इतिहास गैंगवार और अपराध की कहानियों से भरा पड़ा है. अनंत सिंह, सूरजभान सिंह, सोनू-मोनू गैंग और टाल के गुट की अदावत ने इलाके को हमेशा दहशत में रखा है. हाल ही में दुलारचंद यादव की हत्या से फिर सनसनी मच गई. पढ़ें बिहार के मोकामा की ये खूनी कहानी.
Gangs of Mokama: मोकामा... ये नाम सुनते ही दिमाग में गोलियों की आवाज़, सियासी गुटबाजी और बाहुबलियों की ठसक गूंज उठती है. कभी उद्योग नगरी रही मोकामा की ज़मीन अब गैंगवार की गवाही देती है. अनंत सिंह, सूरजभान, सोनू-मोनू और टाल का गुट- ये भले ही चार नाम हों, लेकिन इनकी एक ही कहानी है- सत्ता, जमीन और बदला. हर मोड़ पर मौत का साया, हर गली में किसी गुट की हुकूमत. 1980 के दशक से अब तक मोकामा का अपराधी इतिहास खून, राजनीति और अदावत के किस्सों से भरा है. चुनावी मौसम आते ही यहां का माहौल बारूद बन जाता है. जहां बैलेट नहीं बुलेट ही आख़िरी अंजाम बन जाती है. पढ़ें मोकामा की 'अनंत' कहानी.
अपराध की राजधानी का उदय मोकामा बिहार का एक औद्योगिक केंद्र था. ब्रिटिश काल में वहां रेलवे यार्ड और कारखाने चमकते थे. लेकिन 1980 के दशक से ही वहां अपराध ने जुर्म ने कब्जा जमा लिया. गंगा के टाल क्षेत्र में जमीन और वर्चस्व की लड़ाई ने गैंगवार को जन्म दिया. अनंत सिंह जैसे बाहुबलियों का उदय हुआ. यह इलाका दलहन की खेती के लिए मशहूर था लेकिन अब वहां से हिंसा की खबरें आती हैं. पुलिस रिपोर्ट्स के मुताबिक, वहां हर साल दर्जनों गोलीबारी की घटनाएं होती हैं. स्थानीय लोग कहते हैं कि कानून यहां कम और गुटों का राज ज्यादा चलता है. मोकामा की मिट्टी खून से लाल होती रही है.
'छोटे सरकार' अनंत सिंह का सफर अनंत सिंह का जन्म 1961 में मोकामा के लदमा गांव में हुआ. वह भूमिहार समाज से है और इलाके का सबसे बड़े बाहुबली माना जाता है. 1990 के दशक से वह मोकामा से विधायक बना. जेडीयू और राजद दोनों पार्टियों से चुनाव लड़ा. साल 2020 के हलफनामे के मुताबिक, उनके खिलाफ 38 आपराधिक मामले दर्ज थे. उस पर हत्या, अपहरण और रंगदारी जैसे संगीन आरोप थे. साल 2019 में उसके घर से AK-47 राइफल बरामद हुई थी. इससे उसे 10 साल की सजा मिली थी लेकिन साल 2024 में वो बरी हो गया. उसके समर्थक उसे जननेता कहते हैं और विरोधी मोकामा का डॉन. उसकी संपत्ति 100 करोड़ से ज्यादा बताई जाती है. उसके पास लैंड क्रूजर जैसी लग्जरी और महंगी कारें हैं.
पुराना दुश्मन, नई सियासत सूरजभान सिंह भी मोकामा का बाहुबली है. वो साल 2000 में जेल से ही विधायक बना था. उसने माफिया अनंत सिंह के बड़े भाई दिलीप सिंह को हराया था. सूरजभान पर रामी सिंह की हत्या का मुकदमा चला. हाल ही में सूरजभान राजद में शामिल हुए. उनकी पत्नी वीणा देवी मोकामा से राजद की उम्मीदवार हैं. सूरजभान ने अनंत सिंह की तुलना रावण से की थी. सूरजभान ने कहा कि रावण जैसा ताकतवर भी खत्म हो गया था. सूरजभान की एंट्री से मोकामा में बाहुबली vs बाहुबली की लड़ाई तेज हो गई है. वे टाल क्षेत्र की जलजमाव समस्या हल करने का वादा कर रहे हैं. सूरजभान का प्रभाव यादव और राजपूत वोटों पर है.
सोनू-मोनू गैंग: चुनौती का नया चेहरा सोनू और मोनू सगे भाई हैं. वे मोकामा के जलालपुर गांव के रहने वाले. उनके पिता वकील हैं. दोनों ईंट भट्ठे का कारोबार करते हैं. उनके खिलाफ 12 से ज्यादा हत्या, अपहरण और रंगदारी के मामले दर्ज हैं. खास बात ये है कि ये दोनों कभी अनंत सिंह के लिए काम किया करते थे लेकिन अब इनके बीच दुश्मनी है. साल 2017-18 में इन दोनों भाईयों ने माफिया अनंत सिंह की हत्या की साजिश रची थी. दरअसल, पंचायत चुनाव ने इनके आपसी रिश्ते बिगाड़े थे. जनवरी 2025 में नौरंगा गांव में इन लोगों ने 60-70 राउंड फायरिंग की थी. सोनू ने कहा, शस्त्र-शास्त्र की परिभाषा सिखाएंगे. मोनू को अगस्त 2025 में STF ने गिरफ्तार किया था. उनका गैंग UP के मुख्तार अंसारी गैंग से जुड़ा बताया जाता है.
दुलारचंद यादव की दहशत मोकामा का टाल क्षेत्र गंगा के किनारे बसा है. जहां दुलारचंद यादव का गुट 1980 के दशक से राज करता था. दुलारचंद (76) जमीन कब्जा, रंगदारी और फायरिंग के मामलों का आरोपी था. साल 2019 में ASP लिपी सिंह ने उसे गिरफ्तार किया था. उसके खिलाफ कई थानों में केस दर्ज थे. वह बाहूबली अनंत सिंह को ललकारता था. दुलारचंद कहता था कि छोटे सरकार के खिलाफ बड़ा सरकार आ गया है. साल 2025 के चुनाव में वह जनसुराज के पीयूष प्रियदर्शी का प्रचार कर रहे थे. टाल में उनका दबदबा था लेकिन दुश्मन भी सैकड़ों थे. स्थानीय लोग कहते हैं, टाल का गुट कभी चोरी से शुरू हुआ था लेकिन वो हिंसा में बदलता गया. दुलारचंद की मौत ने इनके बीच की पुरानी अदावतों को उजागर कर दिया है.

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