
Bihar Election 2025: सीवान में कैसे चला शहाबुद्दीन के बेटे ओसामा शहाब का जादू? जानें पूरी इनसाइड स्टोरी
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सीवान में ओसामा शहाब की जीत में उनके पिता शहाबुद्दीन की पुरानी पकड़, स्थानीय जातीय समीकरण और RJD की रणनीति का बड़ा असर रहा. रघुनाथपुर के चुनाव में इन्हीं वजहों से ओसामा को मजबूत समर्थन और शानदार जीत मिली.
Siwan Election Osama Shahab Victory: बिहार की राजनीति में सीवान हमेशा से सत्ता, शक्ति और संगठन का प्रतीक रहा है. साल 2025 के विधानसभा चुनाव में वहां पुराना रंग एक बार फिर देखने को मिला, जब मोहम्मद शहाबुद्दीन के बेटे ओसामा शहाब ने रघुनाथपुर सीट से चुनाव लड़ा और बड़ी जीत हासिल की. 26 राउंड की गिनती के बाद आरजेडी के ओसामा शहाब ने 88278 वोटों के साथ जनता दल (यूनाइटेड) के विकास कुमार सिंह को 9248 वोटों के अंतर से हराया है. विकास कुमार को कुल 79030 वोट मिले. क्या यह सिर्फ पिता की विरासत का असर था या फिर ज़मीनी समीकरणों का बारीकी से बुना गया राजनीतिक गणित? अब ओसामा शहाब को सीवान का नया सुल्तान कहा जा रहा है.
बाहुबली शहाबुद्दीन की विरासतसीवान का नाम आते ही सबसे पहले जिस नाम की चर्चा होती है, वह मोहम्मद शहाबुद्दीन का नाम. RJD के कद्दावर और विवादित नेता के रूप में वह दशकों तक सीवान की सियासत और गद्दी पर राज करते रहे. उनके खिलाफ कई गंभीर आपराधिक मुकदमे दर्ज हुए, लेकिन इसके बावजूद उनका जनाधार कम नहीं हुआ. यही कारण था कि प्रदेश में नेतृत्व बदला, पार्टिया. बदलीं, लेकिन सीवान की धरती पर शहाबुद्दीन फैक्टर कभी कमजोर नहीं पड़ा. ओसामा इसी राजनीतिक विरासत के वारिस के रूप में उभरते दिखाई दिए. पिता की तरह मजबूत पकड़, वही सामाजिक नेटवर्क और वही प्रभाव उनके चुनाव अभियान की रीढ़ बन गया.
RJD का बड़ा दांव राष्ट्रीय जनता दल ने जब रघुनाथपुर से ओसामा शहाब को टिकट दिया, तब यह केवल उम्मीदवार चुनने का फैसला नहीं था. बल्कि यह एक सोची-समझी राजनीति थी. आरजेडी जानती थी कि शहाबुद्दीन का परिवार अभी भी सीवान में बड़ा वोट-बेस नियंत्रित करता है. यही दांव चुनाव में कारगर साबित हुआ. वहीं दूसरी तरफ बीजेपी, JDU और अन्य दलों ने ओसामा को टिकट दिए जाने के खिलाफ तीखी प्रतिक्रिया दी थी. विपक्ष ने शहाबुद्दीन की आपराधिक पृष्ठभूमि का मुद्दा उठाते हुए RJD की नैतिकता पर सवाल खड़े किए थे. लेकिन प्रचार-प्रसार, जनसभाओं और चुनाव इस विरोध का असर नहीं दिखा.
ओसामा का साइलेंट कैंपेन चुनावी रैलियों में ओसामा शहाब बहुत अधिक भाषण देते नहीं दिखे. न बड़े वादे किए और न ही तेज तर्रार बयानबाज़ी. लेकिन उनका नाम ही नारा बन गया. स्थानीय गांवों, पंचायतों और मोहल्लों में RJD के कार्यकर्ता घर-घर जाकर यह संदेश दे रहे थे कि शहाबुद्दीन साहब के बेटे को जिताना है. यानी उम्मीदवार की व्यक्तिगत पहचान से ज्यादा, पारिवारिक पहचान चर्चा में रही. कई रिपोर्टों ने इस अभियान को साइलेंट लेकिन असरदार बताया.
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जातीय वोटों का ध्रुवीकरण सीवान की राजनीति जातीय आधार पर हमेशा से संगठित रही है. यादव, अतिपिछड़े, अल्पसंख्यक और कुछ अन्य समूह RJD का मजबूत वोट-बेस माने जाते हैं. ओसामा के चुनाव मैदान में आ जाने से उनका वोट-बेस और भी एकजुट हुआ. वहीं विपक्ष की कोशिश थी कि स्थानीय क्षत्रप, अगड़ी जातियों और छोटे गुटों को गोलबंद किया जाए. लेकिन शहाबुद्दीन की विरासत का भावनात्मक असर कई जगह पर हावी रहा, जिसने ओसामा को बढ़त दिलाई.

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